समय सारिणी बनाने में कठिनाइयाँ - Difficulties in making timetables
समय सारिणी बनाने में कठिनाइयाँ - Difficulties in making timetables
आदर्श समय सारिणी बनाना अति कठिन है। इसके बनाने में अपूर्व दक्षता तथा योग्यता होनी चाहिए। टाइम टेबुल बनाना एक जटिल काम होता है। इसे बनाने में कभी भी जल्दोबाजी नहीं करनी चाहिए। जहाँ तक हो सके, दोषों को दूर करने का यत्नं करते रहना चाहिए और ऊपर बताए हुए नियमों का पालन करना चाहिए।
कोई भी टाइम-टेबुल प्रत्येक छात्र तथा शिक्षक को संतोष नहीं दे सकता। इसका कारण स्पष्ट है। कुछ छात्र बहुत शीघ्र थक जाते हैं और कुछ देर तक कार्य कर सकते हैं। कुछ छात्र एक ही विषय में रुचि रखकर बहुत देर तक पढ़ना चाहते हैं और कोई उस विषय को पढ़ने में जरा भी दिलचस्पी नहीं लेना चाहते। कक्षा में तेज व कमजोर दोनों प्रकार के बालक होते हैं।
जहाँ तक संभव हो सके प्राय: समय सारिणी ऐसा होना चाहिए जो हमारे छात्रों की मौलिक तथा रचनात्मक प्रवृत्तियों के विकास में सहायक सिद्ध हो। प्राय: निम्नलिखित कठिनाइयाँ टाइम-टेबुल बनाने में उपस्थित होती हैं -
1. कई स्कूलों में धनाभाव के कारण शिक्षकों की कमी होती है। इसलिए कई शिक्षकों को ऐसे विषय पढ़ाने के लिए दिए जाते है, जिनमें उनका ज्ञान काफी नहीं होता।
2. प्राइमरी स्तर पर कई बार एक अध्यापक को एक ही घंटे में दो कक्षाएँ पढ़ानी पड़ती हैं, अतः सारे सिद्धांत धरे रह जाते हैं।
3. अंशकालिक अध्यापकों की नियुक्ति भी कई बार की जाती। अत: वे अपने अवकाश के समय में ही स्कूल आ सकते हैं।
4. जब अध्यापक कम हो तो थकान आदि का विचार छोड़ना पड़ता है। प्रत्येक अध्यापक को अधिक घंटे पढ़ाने के लिए दिए जाते हैं।
5. भवन की कठिनाई के कारण एक ही कमरे में कई बार कुछ विषयों की पढ़ाई के लिए दो कक्षाओं को इकट्ठे बैठना पड़ता है।
6. गणित का अथवा किसी और विषय का यदि एक ही अध्यापक है तो भी थकावट के सिद्धांत के अनुसार समय-विभाग-चक्र बनाना कठिन हो जाता है।
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