लोकतंत्र, नागरिकता और मानवाधिकार के विमर्श और सामाजिक विज्ञान शिक्षक के निहितार्थ - Discourse on democracy, citizenship and human rights and the implications of a social science teacher
लोकतंत्र, नागरिकता और मानवाधिकार के विमर्श और सामाजिक विज्ञान शिक्षक के निहितार्थ - Discourse on democracy, citizenship and human rights and the implications of a social science teacher
लोकतंत्र और मानवाधिकार की रक्षा के लिए नागरिकता की शिक्षा आवश्यक है। समाज शिक्षा का केंद्र विद्यालय को माना जाता है। समाज शिक्षा में उत्तम एवं आदर्श नागरिकों की भूमिका महत्वपूर्ण है। प्रो. बाईनिंग तथा बाईनिंग के अनुसार, “ विद्यालय वर्तमान परिस्थितियों तथा हमारे आधुनिक समाज में फैले हुए अन्याय, अश्लीलता एवं भ्रष्ट्राचार की अवहेलना नहीं कर सकते है। उनको छात्रों को प्रभावशाली ढंग से प्रशिक्षित करना चाहिए, जिससे भावी नागरिक सुशासन में सक्रिय भाग तथा रूचि ले सकें और साथ ही वे अपने सामाजिक सम्बन्धों में नैतिकता का उपयोग कर सकें।" शिक्षा आयोग ने भारतीय स्थिति के सन्दर्भ में लिखा है कि, “भारत की एक निराली स्थिति है, क्योंकि उसके यहाँ अनासक्ति, सहिष्णुता अनेक बार यह बहुमूल्य भुला दी गयी तथा हम निराशावाद, भय, अनिष्ट कथन, वैमनस्य तथा हानिकारक आलोचना की मनोवृत्ति में फंस गए। अतः इस समय आवश्यकता इस बात की है कि शांति और स्वतंत्रता, सत्य और करुणा के महान आदर्श के लिए जीवित रहने के रूप में हमारा नया अभिमान और गहरी आस्था अभिव्यक्त हो।"
इससे यह स्पष्ट होता है कि ऐतिहासिक परम्पराओं के साथ समाज को नए ढांचे में उन्नति की ओर अग्रसर बनाने के लिए सुयोग्य नागरिक निर्माण में शिक्षण-प्रशिक्षण की महत्वपूर्ण भूमिका है। सुयोग्य नागरिक ही लोकतंत्र और मानवाधिकार का संरक्षण एवं संवर्धन कर सकता है।
1) आर्थिक प्रशिक्षण :
सुयोग्य नागरिक के लिए जीविकोपार्जन की वैयक्तिक क्षमता का विकास होना आवश्यक है। स्वयं की जीविकापार्जन स्वयं कर सके ताकि वह समाज पर बोझ न बने। विभिन्न शिक्षण-प्रशिक्षण एवं तकनीकी संस्थाओं की सहायता से आर्थिक प्रशिक्षण की सुविधा उपलब्ध कराकर छात्रों को आर्थिक दृष्टि से सक्षम बनाने के लिए प्रोत्साहित कर सकते है। जब प्रत्येक व्यक्ति आर्थिक दृष्टि से सक्षम होगा तभी राष्ट्र सक्षम होगा।
2) सामाजिक प्रशिक्षण :
सहयोग. सहिष्णुता. सामाजिक संवेदना, अनुशासन, सामाजिक सक्रियता, समाजसेवा की भावना आदि गुणों के विकास छात्रों में होने के लिए सामाजिक प्रशिक्षण की आवश्यकता होती है। संवैधानिक मूल्य एवं अन्तरराष्ट्रीय मानवाधिकार मूल्यों के संरक्षण एवं संवर्धन के लिए समाज शिक्षा की आवश्यकता है। विद्यालयों के साथ परिवार, समुदाय, सामाजिक समूह, पत्र-पत्रिकाएं, रेडियो, दूरदर्शन आदि की भूमिका महत्वपूर्ण है।
3) सांस्कृतिक प्रशिक्षण :
पुरखों द्वारा राष्ट्रीय विरासत, ऐतिहासिक परंपरा, आध्यत्मिक शक्ति एवं संस्कृति की रक्षा करना आदर्श नागरिक का परम कर्तव्य है।
शालेय एवं सहशालेय गतिविधियों के साथ-साथ ऐतिहासिक वास्तु एवं वस्तुएं, अजायबघर, सांस्कृतिक केन्द्रों का अवलोकन उपयुक्त रहेगा। आदर्श नागरिक का संस्कृति रक्षक होना आवश्यक है।
4) राजनैतिक प्रशिक्षण:
विश्व का प्रत्येक राष्ट्र चयनित शासन प्रणाली के अनुसार शासन व्यवस्था चलाता है। विश्व के अधिकांश देशों ने लोकतंत्र को स्वीकार किया है। भारत में स्वीकृत की गयी लोकतान्त्रिक व्यवस्था केवल शासन प्रणाली ही नहीं बल्कि जीवन प्रणाली भी है। लोकतांत्रिक शासन प्रणाली को सफल बनाने के लिए राजनैतिक प्रशिक्षण की आवश्यकता है। भारतीय संविधान में अन्तर्निहित लोकतान्त्रिक एवं मानवाधिकार से सम्बंधित तत्वों का परिपोष शिक्षा की सहायता से नागरिकों में होना आवश्यक है। हक्सले का कहना है कि “यदि स्वतंत्रता और लोकतंत्र आपका लक्ष्य है तो लोगो को स्वशासन की कला सिखानी पड़ेगी।
व्यक्ति को लोकतांत्रिक मूल्य मानवाधिकार के तत्वों का पालन करने वाला आदर्श नागरिक बनाने में सामाजिक विज्ञान शिक्षण महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते है। प्रो. बाईनिंग तथा बाईनिंग के अनुसार, “सामाजिक अध्ययन को सामाजिक तथा नागरिक प्रशिक्षण प्रदान करने का प्रमुख दायित्व अपने ऊपर लेना चाहिए. परन्तु पाठ्यक्रम के प्रत्येक विषय को इसके लिए योगदान देना चाहिए।" सामाजिक विज्ञान शिक्षक पर यह दायित्व सर्वाधिक है कि लोकतांत्रिक मूल्य मानवाधिकार के तत्वों का पालन करने वाला आदर्श नागरिक निर्माण हो। स्वशासन, सामाजिक क्रियाएँ, अभिनयात्मक क्रियाएँ, साहित्यिक क्रियाएँ, समुदाय संगठन, खेलकूद गतिविधियाँ आदि की सहायता से लोकतांत्रिक मूल्य मानवाधिकार के तत्वों का पालन करने वाला आदर्श नागरिकता के गुणों को विकसित किया जा सकता है।
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