प्रबंधकीय लेखा-विधि व लागत लेखा-विधि में भेद - Distinction Between Management Accounting and Cost Accounting

प्रबंधकीय लेखा-विधि व लागत लेखा-विधि में भेद - Distinction Between Management Accounting and Cost Accounting


लागत लेखा-विधि भी प्रबंधकीय लेखा-विधि का ही एक अंग है। ऐतिहासिक लागत लेखा - विधि और प्रबंधकीय लेखा-विधि में तो भेद महत्वपूर्ण दिखाई देता है परन्तु आधुनिक लागत लेखा-विधि, जिसमें सीमांत लागत, उत्पादन सीमा-स्तर बिन्दु विश्लेषण, प्रमाप लागत, एकरूपता लागत आदि का समावेश किया जाता है, प्रबंधकीय लेखा-विधि का ही समरूप बन जाता है और सामान्य व्यक्ति के लिए दोनों में कोई भी भेद प्रतीत नहीं होता है। इसके बावजूद भी दोनों में सूक्ष्म अंतर पाये जाते हैं, जिसकी विवेचना इस प्रकार है :


(1) लागत लेखा विधि का प्रमुख उद्देश्य वस्तु उत्पाद या सेवा की प्रति इकाई लागत ज्ञात करना व निर्धारण करना होता है, परन्तु प्रबंधकीय लेखा-विधि प्रबंधकीय क्रियाओं के समक्ष संचालन व निष्पादन में प्रबंध की सहायता हेतु लागत समंकों के प्रस्तुतिकरण पर जोर देती है। 


(2) लागत लेखा विधि अधिकतम भूत व वर्तमान से संबंधित तथ्यों पर ही आधारित होती है लेकिन प्रबंधकीय लेखा-विधि में भावी तथ्यों का (भूत व वर्तमान के संदर्भ में) विवेचन किया जाता हैं।


(3) यद्यपि लागत लेखा विधि प्रबंधकीय लेखा विधि का एक अंग है, फिर भी प्रबंधकीय लेखा-विधि का क्षेत्र उससे अधिक व्यापक है। इसमें लागत लेखा विधि द्वारा प्रदत्त सूचनाओं के अलावा अन्य लेखाकन सूचनाओं गैर-मौद्रिक तथ्यों का भी प्रयोग किया जा सकता है। 


(4) लागत लेखा विधि में कुछ निश्चित सिद्धांतों व प्रारूपों का प्रयोग किया जाता है, परन्तु प्रबंधकीय लेखा - विधि में प्रबंधक आवश्यकता के अनुरूप प्रारूपों व सिद्धातों में परिवर्तन लाकर तथ्यों का अनुविन्यसन किया जाता है।


(5) लागत लेखा विधि द्वारा प्रदत्त समकों व तथ्यों में आंतरिक व बाह्य दोनों पक्ष (व्यक्ति) अभिरूचि रखते है, परन्तु प्रबंधकीय लेखा-विधि द्वारा प्रस्तुत समक में केवल प्रबंध ही रूचि रखते हैं।