अतिपूंजीकरण के कारण - due to overcapitalization

अतिपूंजीकरण के कारण - due to overcapitalization


निम्नलिखित विभिन्न कारणों से अतिपूजीकरण की स्थिति निर्माण होती है।


1. पूंजीकरण के अधिक्य मात्रा में निर्गमन (Over Issue of capital) – नये कंपनिके प्रवर्तक वित्तीय मांग का अनुमान जादा मात्रा में करते, जिससे कंपनी की मांग से भी जादा मात्रा में पूंजीकरण का निर्गमन किया जाता है। मांग से जादा प्राप्त किए गए पूंजीकरण का लाभदायक उपयोग नही करने पर कंपनी में अती पूजीकरण की स्थिती निर्माण होती है।


2 सपत्ती की ज्यादा किमत पर क्रय करना (Purchase of Assets on Higher prices) कंपनी के प्रवर्तको कम किमत की संपत्ती को ज्यादा किमत पर क्रय करने की स्थिति में कंपनी को अति पूंजीकरण स्थिति से गूजरना पडता है।

ज्यादा किमत पर संपत्ती खरेदी करने से कंपनी का मुनाफा (लाभ) प्राप्त करने की क्षमता कम होती है। जिससे लाभाष का दर कम होते हुए अंश बाजार में अशों का मुख्य कम होता है। अंश बाजार में कंपनी के अशों के मुख्य की अवमुख्यन होता है यह अतिपूंजीकरण का निर्देशांक माना जाता है।


3. ज्यादा मात्रा में प्रवर्तन व्यय (High Promotion Expenses ) - कंपनी स्थापित करते समय प्रवर्तको द्वारा ज्यादा मात्रा में व्यय करने पर स्थिर पूजी की उपयोगीता पर प्रभाव पड़ता है। स्थिर पूजी का उपयोग अस्थिर या चल सपत्ती पर व्यय करने पर अति पूंजीकरण की स्थिती निर्माण होती है।


4. उत्पाद की मांग में घट (Decrease in the Demand of product) – कंपनीच्या उत्पाद की मांग अगर नियमित तौर पर घटने से कंपनी के आय में कमी होती है जिससे लाभ का दर कम होता है। लाभ का दर कम होने से पूंजीकरण के प्रत्याय का दर भी कम होता है। प्रत्याय का दर कम होने के कारण, कपनि में अति पूंजीकरण की स्थिति निर्माण होती है।


5. लाभाश निती – लांभाश का दर यह कंपनी के आर्थिक स्थिती दर्शाने हेतु प्रमाण माना जाता है। कुछ कंपनिया जान बुझ कर ज्यादा दर से लाभाश का वितरण करते है। जिस के फल स्वरूप आपत्कालिन स्थिती में राशी या संचिती (Reserve Fund) निर्माण नहीं हो शकता। ऐसे स्थिती में कंपनी की आय प्राप्ती की क्षमता कम होती है। ऐसे कंपनी को भविष्य में अति पूंजीकरण की स्थिती से निपटना पड़ता है।


6. पूंजीकरण दर का कम मात्रा में अनुमान कंपनी के पूजीकरण का दर अगर कम मात्रा में (Forecast) अनुमानित किया गया तो उस कपनि मे अति पूजीकरण की स्थिति निर्माण होती है।