ईस्ट इंडिया कम्पनी के प्रयास- East India Company's efforts

 ईस्ट इंडिया कम्पनी के प्रयास - East India Company's efforts


कंपनी काल में शिक्षा के प्रसार के निम्नलिखित कारण थे-


1) कंपनी की शिक्षा नीति (1765-1813)


कंपनी की शिक्षा नीति प्लासी तथा बक्सर के युद्ध में विजय प्राप्त होने के बाद बदल गयी। साम्राज्य की स्थापना करने हेतु उन्होंने धार्मिक तटस्थता की नीति का अपनाया और विद्यालयों की सहायता देनी बंद कर दो।


2) तुष्टीकरण-वारेनहेस्टिंग (1781 ई.) नाम के अग्रेज अधिकारी ने मुसलमानों को खुश करने के लिये कलकत्ता मदरसा खाली, इसमें अरबी भाषा के माध्यम से कुरान, कानून, गणित, तर्क तथा व्याकरण आदि पहाय जाते थे जानाधन डंकल ने बनारस में संस्कृत कॉलेज और लार्ड वेलेजली ने कलकला में फोर्टविलियम कॉलेज की स्थापना की।


3) शिक्षा के व्यक्तिगत प्रयत्न-श्रीमती कैम्प बैल (1786) ने मद्रास में बालिका अनाथालय खोला। डॉ इन्डयुबैल (1781 है) न एक अनाथ आश्रम खोला 1788 ई. में ब्राउन ने हिंदुओं के लिए अंग्रेजी शिक्षा के लिए विद्यालय खोला। श्रीमती पिट, लाइन, कॉपलेण्ड आदि ने भी अनेक विद्यालय खोले।


4) मिशनरी प्रयास:


एग्लिकन मिशनरियों ने कलकत्ता में दानाथित स्कूल चलाया। एक निःशुल्क स्कूल भी खाला श्रीरामपुर (१८००) में एक प्रेस लगाया गया जिसमें पुस्तक छापी जाने लगी वैपटिस्ट मिशन ने शिक्षा के प्रसार के प्रशंसनीय कार्य किये।


(5) ब्रिटिश संसद की भूमिका- चार्लग्रांट (1767-1789) भारत में कम्पनी के शासन में बालग्राट चयरमैन बना जिसने भारतीया की अज्ञानता का लाभ उठाया और उनका पाश्चात्य शिक्षा दिये जाने पर जोर दिया। 


6 ) सन 1793 का आज्ञापत्र प्राट के विचार से प्रभावित होकर विलियस बिल्वर फोर्स न ज्ञापत्र में यह संशाधन रखा कि ब्रिटिश सभा का यह विशेष तथा अनिवार्य कर्तव्य है कि वह समस्त उचित बुद्धिमत्तापूर्ण साधना द्वारा भारत में अंग्रेजी राज्य के हित एवं समृद्धि के लिए कार्य कर और इन उद्दशा को प्राप्ति क लिये एस साधनों को अपनाय जिससे भारतीयां के ज्ञान, धर्म, तथा नैतिकता का स्तर उंचा उठ। इस प्रस्ताव के विरोध में शार्प ने कहा हिंदुओं को धार्मिकता तथा नैतिकता उतनी ही उत्तम है जितनी अन्य व्यक्तियों को उनके धर्म परिवर्तन का प्रयास करना अथवा अधिक ज्ञान देना पागलपन होगा। 


7) सन 1813 का आज्ञापत्र:- सन 1793 के शिक्षा प्रस्ताव को अस्वीकार करने के बाद भी ईसाई पादरियों ने अपना कार्य जारी रखा। 1813 में कंपनी के आज्ञापत्र का नवीनीकरण होना था। इस समय एक प्रस्ताव रखा गया कि भारत में दिनों दिन शिक्षा की अवनति हो रही है, अत: कंपनी की सरकार का भारत के लोगों की शिक्षा का उत्तरदायित्व लेना चाहिये और इस कार्य के लिये धन खर्च करना चाहिये यह प्रस्ताव स्वीकृत हुआ।