शिक्षा प्रक्रिया - Education Process

शिक्षा प्रक्रिया - Education Process


शिक्षा प्रक्रिया को भली भांति समझने के लिए आवश्यक है कि हम पहले इसकी विशेषताओं को जाने शिक्षा प्रक्रिया की विशेषताओं से शिक्षा की प्रक्रिया स्पष्ट होती है। शिक्षा प्रक्रिया की विशेषताय निम्नांकित हैं-


1) शिक्षा आजीवन चलने वाली प्रक्रिया है


हिन्दू दर्शन के अनुसार शिक्षा प्रक्रिया जन्म से पूर्व तभी आरम्भ हो जाती है जब बच्चा माता के गर्भ में ही रहता है महाभारत की कथा के अनुसार अभिमन्यु ने चक्रव्यूह को बेधना अपनी माता सुभद्रा के गर्भ में ही ही सीख लिया था। अर्थात् शिक्षा जन्म से आरम्भ होती है तथा मृत्यु पर्यन्त तक चलती है।


2) शिक्षा एक विकासात्मक प्रक्रिया है


रूसो का कहना है कि, शिक्षा अन्दर के विकास को कहते है न कि बाहर के विकास को ऐसा ही विचार पैस्टालाजी का भी है- कि शिक्षा मनुष्य की जन्मजात शक्तियों का स्वाभाविक एवं प्रगतिशील विकास है। गांधीजी का कहना है कि, "शिक्षा से मेरा अभिप्राय बालक तथा मनुष्य के शरीर मन और आत्मा में अन्तनिर्हित सर्वोत्तम शक्तियों के सर्वागीण विकास से है।


3) शिक्षा एक समय प्रक्रिया


शिक्षा प्रक्रिया में व्यक्ति का समग्र विकास होता है न कि अलग अलग। इसमें विकसित होने वाले अंग साथ-साथ कार्य करते हा जैसे मस्तिष्क की पेशियां भी कार्यरत रहती ही शरीर के साथ साथ मानसिक विकास भी होता है। 


4) शिक्षा एक द्विमुखी प्रक्रिया


एडम्स का मत है कि शिक्षा एक दविमुखी प्रक्रिया है। इसके एक और विद्यार्थी और दूसरी ओर शिक्षक रहता है। रास महोदय ने भी एडम्स के इस मत का समर्थन किया है और कहा है कि, चुम्बक की तरह शिक्षा के भी दो पुत्र हैं। शिक्षा की प्रक्रिया में व्यक्ति का सर्वागीण विकास होता है। इस प्रक्रिया में अनेक घटक शामिल होते हैं। व्यापक दृष्टिकोण से इसमें देश, समाज, स्कूल, अध्यापक छात्र तथा अभिभावक किसी न किसी रूप में इस प्रक्रिया में सम्मिलित होते हैं। एक कहता है, दूसरा सुनता है. एक पढ़ता है, दूसरा पढ़ाता है। शिक्षा तो छात्र को अध्यापक से भी अधिक महत्वपूर्ण मानती है। ड्युवी ने शिक्षा को समाजीकरण की प्रक्रिया कहा है।


5) शिक्षा एक त्रिमुखी प्रक्रिया है


एडम्स की बात को ड्युवी ने भी माना है, किन्तु उसके साथ एक और तत्व जोड़कर उसने शिक्षा को विमुखी के बदले त्रिमुखी कहा है। इसमें शिक्षक एवं छात्र के अलावा सामाजिक तत्वों का भी योगदान होता है और इसका महत्व उन दोनों से कम नहीं होता है।


6) शिक्षा एक पंचमुखी प्रक्रिया


20 वी शताब्दी के अन्त और 21 वी शताब्दी के आरम्भ होते होते शिक्षा की प्रक्रिया में कई और घटक भी जुड़ गये हैं शिक्षा प्रक्रिया में छात्र, शिक्षक, विषय तथा पाठ्येत्तर क्रियाओं के साथ साथ वर्तमान तथा भविष्य की मांग और जनसंचार की भूमिका महत्वपूर्ण होती है। वर्तमान एवं भविष्य के लिये छात्रों को सक्षम बनाने में शिक्षा का योगदान महत्वपूर्ण है शिक्षा के प्रसार में जनसंचार की भूमिका अहम् है।


7) शिक्षा एक चेतन एवं प्रयोजनशील प्रक्रिया है


एड्म्स ने लिखा है कि शिक्षा एक सचेतन एवं बिचारप्रधान प्रक्रिया है जिसमें एक व्यक्ति दूसरे पर इसलिए प्रभाव डालता है कि दूसरे का विकास और परिवर्तन हो सके इसलिए शिक्षा प्रयोगविहीन प्रक्रिया नहीं हो सकती। शिक्षा व्यक्ति के निर्माण एवं लाभ के लिए होती है। इससे व्यक्ति को चेतना प्राप्त होती है और वह अपना लक्ष्य प्राप्त करता है। 


8) शिक्षा एक गतिशील प्रक्रिया है


शिक्षा स्थिर नहीं. विकासोन्मुख है। इसमें परिवर्तन होता है। शिक्षा के गतिशील स्वरूप को सभी शिक्षाशास्त्री स्वीकार करते हैं। शिक्षा जीवन के लिए है। एक तरह से शिक्षा स्वयं जीवन है। जीवन विकास है, जीवन का अर्थ गति है। इस प्रकार शिक्षा गतिशील हैं। इसी को ध्यान में रखकर रेमंड ने लिखा है कि शिक्षा विकास का वह कम है, जिसमें व्यक्ति की शैशवावस्था से प्रौढावस्था तक की वे क्रियाएं निहित हैं, जिनके द्वारा वह अपने को धीरे धीरे भिन्न भिन्न तरीकों से अपने भौतिक, सामाजिक एवं अध्यात्मिक बातावरण के अनुकूल बनाता है।


ड्यूवी के अनुसार "शिक्षा व्यक्ति की उन सभी क्षमताओं का विकास है जिससे व्यक्ति बातावरण पर नियंत्रण करने योग्य बनता है। 


9) शिक्षा परिवर्तन है


शिक्षा व्यक्ति के व्यवहार एवं आचार विचार में परिवर्तन लाती है।

जन्म के समय बालक असहाय, अव्यावहारिक एवं अशिक्षित होता है। शिक्षा ही उसे व्यावहारिक, शिक्षित, सभ्य, सुसंस्कृत एवं परिष्कृत बनाती है। शिक्षा क्षमता में परिवर्तन लाती है और बालक को क्षमताशील बनाती है। वह अज्ञान के बदले ज्ञान का भण्डार भरती है तथा विचारों, आदर्शों एवं अभिप्रेरणाओं में परिवर्तन लाती है। हमारी दुनिया में होने वाले सभी परिवर्तन शिक्षा के माध्यम से ही आते हैं।


10) शिक्षा व्यक्ति को प्रशिक्षित करने की प्रक्रिया है।


शिक्षा व्यक्ति को प्रत्येक क्षेत्र के लिए प्रशिक्षण देती है। वह व्यक्ति को भौतिक एवं मानसिक दोनों ही क्षेत्रों में प्रशिक्षण प्रदान करती है। भौतिक क्षेत्र में प्रशिक्षण देकर शिक्षा व्यक्ति को रोजी रोटी के लिये तैयार करती है तथा आर्थिक दृष्टि से सुदृढ़ करती है। मानसिक क्षेत्र में प्रशिक्षण से तरह तरह के ज्ञान और कौशल का विकास होता है।


11) शिक्षा एक सामाजिक प्रक्रिया है


शिक्षा प्रक्रिया व्यक्ति को शून्य में नहीं अपितु सामाजिक वातावरण में प्रशिक्षित करती है।


12) शिक्षा उद्देश्ययुक्त प्रक्रिया है


शिक्षा प्रक्रिया केवल शिक्षा के लिए नहीं है अपितु इसका एक निश्चित प्रयोजन होता है। घर परिवार, समुदाय, बाजार आदि में अन्य व्यक्तियों के साथ हमारा संपर्क होता है और उनके साथ अंतःक्रिया द्वारा वह सीखता है।


13) शिक्षा एक मनोवैज्ञानिक प्रक्रिया है


शिक्षा में छात्रों की रुचियों, अभिरुचियों, क्षमताओं तथा आवश्यकताओं पर ध्यान दिया जाता है। 


14) शिक्षा एक गतिशील प्रक्रिया है


शिक्षा के उद्देश्यों, पाठ्यक्रम, शिक्षण विधियों आदि में समय के अनुसार परिवर्तन किये जाते है। 


15) शिक्षा सर्वोत्तम विकास की प्रक्रिया है


गांधीजी ने शिक्षा का अर्थ मनुष्य के शरीर, मस्तिष्क तथा आत्मा का उत्कृष्ट विकास से माना है।


16) शिक्षा प्रक्रिया वैज्ञानिक तथा कलात्मक है


शिक्षा को विज्ञान तथा कला दोनों की सजा दी जाती है। इससे शिक्षा की व्यापकता का पता चलता है।


17) शिक्षा व्यक्तिगत तथा सामाजिक संयोजन की प्रक्रिया है


शिक्षा ऐसी प्रक्रिया है जो व्यक्ति तथा समाज में सामजस्य स्थापित करने में अहम् भूमिका निभाती है। 


18) शिक्षा ज्ञानात्मक क्रियात्मक तथा कौशल्यात्मक भावात्मक प्रक्रिया है।


शिक्षा में विषयों का ज्ञान दिया जाता है। साथ में उसमें कौशलों तथा मूल्यों को धारण करने हेतु प्रशिक्षण दिया जाता है।


19) शिक्षा प्रक्रिया तथा परिणाम दोनों ही है


किलपैट्रिक तथा क्राउडी आदि ने शिक्षा को प्रक्रिया और परिणाम दोनों माना है। शिक्षा शिक्षण प्रशिक्षण तथा सामाजिक अनुभवों का परिणाम होती है।


20) शिक्षा सैद्धांतिक तथा क्रियात्मक है


शिक्षा जानात्मक तथा व्यावहारिक है। शिक्षा बच्चे का बौद्धिक विकास करती है तथा सदैव प्रगति करते रहने की कला का विकास भी करती है।