शैक्षिक आकलन - educational assessment
शैक्षिक आकलन - educational assessment
“आकलन कार्यक्रमों को परिमार्जित तथा विद्यार्थियों के अधिगम में सुधार लाने के लिए विद्यार्थियों के अधिगम पर अनुभवजन्य का आकड़ों का उपयोग सम्मिलित करता है।" [एलेन (Allen), 2004] “आकलन विभिन्न तथा विविध स्रोतों से सूचना संग्रहित करने तथा उस पर विचार-विमर्श करने की प्रक्रिया है जिसमें इस बात की गहरी समझ विकसित होती है की विद्यार्थी क्या जानते हैं क्या समझते हैं तथा अपने शैक्षिक अनुभव से प्राप्त ज्ञान के साथ क्या कर सकते हैं; यह प्रक्रिया तब समाप्त होती है जब आकलन परिणामों का उपयोग आगामी अधिगम में सुधार लाने के लिए किया जाता है।" [ ह्युबा एवं फ्रीड (Huba and Freed), 2000]
“आकलन विद्यार्थियों के अधिगम तथा विकास के संबंध में निष्कर्ष लेने के लिए व्यवस्थित आधार है। यह सूचनाओं को परिभाषित करने, चयन करने, रचना करने, संग्रह करने, विश्लेषण करने, विद्यार्थियों के अधिगम तथा विकास में संवर्धन के लिए सूचनाओं का उपयोग करने की प्रक्रिया है।" [ एर्विन (Erwin), 1991]
“आकलन विद्यार्थियों के अधिगम तथा विकास में सुधार लाने के लिए आरम्भ किए गए शैक्षिक कार्यक्रमों के संबंध में सूचनाओं का व्यवस्थित संग्रह, समीक्षा तथा उपयोग है।" [पेलोम्बा एवं बेनटा (Palomba & Banta ), 1999]
उपर्युक्त आकलन के परिभाषाओं के विश्लेषण से यह कहा जा सकता है कि आकलन एक वृहद् अवधारणा है जो विद्यालयी शिक्षा में एक तंत्र के रूप में प्रलक्षित होता है जिसके अंतर्गत मापन एवं मूल्यांकन जैसी अवधारणाएँ सम्मिलित होते हैं। आकलन मूलतः एक ऐसी प्रक्रिया है जिसके अंतर्गत विद्यार्थियों के अधिगम एवं विकास संबंधी सूचनाएँ तथा आकड़े व्यवस्थित रूप से संग्रहित किए जाते हैं। इन सूचनाओं का संग्रह मापन प्रक्रिया द्वारा होता है। इसमें मात्रात्मक तथा गुणात्मक दोनों प्रकार के मापन की सुविधा होती है। यह सूचनाएँ विद्यार्थियों के प्रतिदिन विद्यालयी एवं कक्षा अधिगम-सह-आकलन या निश्चित समय-अंतराल पर विशिष्ट रूप से आकलन के लिए आयोजित गतिविधियों में सहभागिता तथा प्रदर्शन से संबंधित होते हैं। इस प्रकार आकलन स्वयं को एक निरंतर चलने वाली प्रक्रिया के रूप में प्रस्तुत करता है जिससे किसी विशिष्ट सत्र के दौरान विद्यार्थियों के अधिगम में क्रमशः विकास की जानकारी प्राप्त होती है। साथ ही साथ आकलन एक बहुआयामी प्रक्रिया है जिसमें विद्यार्थियों के अधिगम एवं विकास के विभिन्न पहलुओं-संज्ञानात्मक, भावात्मक एवं मनोगत्यात्मक आयामों का आकलन सम्मिलित होता है। अंततः आकलन मापन द्वारा संग्रहित आकड़ों का मूल्यांकन की प्रक्रिया द्वारा गहन समीक्षा करता है तथा इस प्रकार प्राप्त परिणामों के आधार पर विद्यार्थियों के अधिगम तथा शैक्षणिक गतिविधियों में तदनुरूप सुधार लाने के लिए मूल्यनिहित निर्णय लेता है।
वार्तालाप में शामिल हों