शिक्षा संस्थाऐं , वैदिककालीन शिक्षा के दोष - Educational Institutions, Defects of Vedic Education
शिक्षा संस्थाऐं , वैदिककालीन शिक्षा के दोष - Educational Institutions, Defects of Vedic Education
1) केवल संस्कृत भाषा पर जोर:- वैदिक कालखंड में शिक्षा संस्कृत भाषा में दो जाती थी इसलिए अध्ययन-अध्यापन में संस्कृत भाषा का हो प्रयोग किया जाता या परिणाम स्वरुप अन्य भाषाओं का विकास नहीं हो पाया।
2) शूदों की शिक्षा की उपेक्षा:- प्राचीन भारत में शूद्रों के लिए शिक्षा के द्वार बंद ध इसलिए उन्ह शिक्षा से वंचित रखा गया। 3) जनसाधारण की शिक्षा की उपेक्षा:- प्राचीन काल में संस्कृत पर जोर दिया गया लोकभाषा की उपेक्षा की गई और इसलिए जनसाधारण की शिक्षा का विकास न हो सका।
4) स्त्री शिक्षा की उपेक्षा:- प्राचीन कालखंड में स्त्रिया की शिक्षा के लिए पर्याप्त व्यवस्था न होने के कारण स्त्री शिक्षा की उपक्षा की गई।
(5) सांसारिक जीवन की उपेक्षा:
शिक्षा में कवल आध्यात्मिक पक्ष का महत्व दन के कारण सांसारिक जीवन की उपेक्षा होने लगी।
6) वैचारिक स्वतन्त्रता का अभाव :
प्राचीन भारतीय शिक्षा में धर्म का अत्यधिक महत्व दिए जाने के कारण धर्मशास्त्रों में लिखी हुई बातों पर आँख बंद करके विश्वास करने लगे इसलिये वैचारिक स्वतन्त्रता का अभाव दिखने लगा।
7) हस्तकार्य व शारीरिक श्रम के प्रति घृणा:
धार्मिक शिक्षा का महत्व अत्यधिक होने के कारण हस्तकार्य व शारीरिक श्रम का महत्व कम मिला।
8) धर्म को अत्याधिक महत्व:
प्राचीन भारतीय शिक्षा में धर्म का अत्यधिक महत्व दिया गया।
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