शैक्षिक तकनीकी : क्षेत्र एवं महत्त्व - Educational Technology: Scope and Significance

शैक्षिक तकनीकी : क्षेत्र एवं महत्त्व - Educational Technology: Scope and Significance


शैक्षिक तकनीकी के अनुप्रयोग के निम्नलिखित क्षेत्र हैं-


1. शिक्षण का नियोजन (Planning of Teaching ) : इसमें कार्य - विश्लेषण, अधिगम उद्देश्यों का निर्धारण, अधिगम उद्देश्यों का वर्गीकरण तथा उन्हें व्यावहारिक पक्ष में लिखने के विभिन्न उपागम ब्लूम, मिलर, मेगर, RCEM; पाठ योजना के निर्माण के विभिन्न उपागम हरबर्ट, डीवी, मोरिसन, ब्लूम, मानव प्रकृति से जुडी अवधारणाएँ, कक्षा प्रबंधन आदि सम्मिलित किए जाते हैं।


2. अधिगम वातावरण ( Learning Environment): इसके अंतर्गत शिक्षक-शिक्षार्थी अनुपात, विद्यार्थियों के बैठने की व्यवस्था, अलमीरा या कपबोर्ड की व्यवस्था, कक्षा की स्वच्छता, सजावट तथा भौतिक सुविधाएँ, शिक्षण-अधिगम सामग्री तथा प्रयोगों के प्रदर्शन की व्यवस्था,

चाकबोर्ड (स्मार्ट क्लास रूम के लिए स्मार्ट बोर्ड) की व्यवस्था तथा शिक्षक एवं शिक्षार्थी के बीच संप्रेषण का स्वरुप, शिक्षकों द्वारा पूछे जानेवाले प्रश्नों का स्वरुप आदि आते है। 


3. शिक्षण-अधिगम प्रक्रिया (Teaching Learning Process): इसके अंतर्गत शिक्षक, शिक्षार्थी तथा पाठ्यवस्तु के बीच होनेवाली अन्तः क्रिया को सम्मिलित किया जाता है। इसमें अधिगम या मनोवैज्ञानिक सिद्धांत, शिक्षण युक्तियाँ, शिक्षण प्रतिमान, व्यक्तिगत अध्ययन सामग्री ( अभिक्रमित अधिगम एवं कंप्यूटर सहायक अधिगम ), शिक्षण का प्रशासन, विद्यार्थियों को निर्देशित किया जाना, अभिप्रेरणा, पुनर्बलन तथा पृष्ठ पोषण, शिक्षण-अधिगम सामग्री (श्रव्य दृश्य सामग्री एवं मल्टीमीडिया ) का प्रयोग, नवाचारी शिक्षण युक्तियाँ आदि पर बल दिया जाता है।


4. संप्रेषण के साधन (Means of Communication): इसके अंतर्गत संप्रेषण की प्रक्रिया, संप्रेषण के प्रकार, संप्रेषण में अवरोध, संप्रेषण के साधन, उपयुक्त श्रव्य-दृश्य साधन का चयन, श्रव्य-दृश्य साधनों के प्रकार, मल्टीमीडिया एवं जनसंचार उपागम आदि सम्मिलित होते हैं।


5. शिक्षक के व्यवहार में परिवर्तन (Modification iin Teacher's Behaviour): इसके अंतर्गत पुनर्बलन एवं प्रतिपुष्टि में अंतर, सूक्ष्म शिक्षण, शिक्षण कौशल (पाठ-प्रस्तावना, व्याख्या, प्रश्न पूछना, उदाहरण के साथ स्पष्टीकरण, पुनर्बलन तथा प्रतिपुष्टि उद्दीपन परिवर्तन, श्यामपट्ट लेखन), अनुकरणीय शिक्षण, कक्षा-कक्ष अंतःक्रिया विश्लेषण आदि तत्वों पर बल दिया जाता है।


6. शिक्षण का नियंत्रण (Controlling Teaching): इसके अंतर्गत मूल्यांकन व्यवस्था मूल्यांकन की प्रक्रियाएँ, अधिगम मापन, आकलन के उपकरण, उपलब्धि परीक्षण आदि आते हैं।


7. अनुसंधान (Research) : इसमें शिक्षण तथा अन्य शैक्षिक क्रियाओं में सुधार हेतु क्रियात्मक अनुसंधान पर बल दिया जाता है साथ-ही-साथ अनुसंधान को अधिक सक्षम एवं विश्वसनीय बनाने हेतु कंप्यूटर के प्रयोग को भी सम्मिलित किया जाता है।


8. विद्यालय प्रशासन एवं प्रबंधन (School Administration and Management) : शैक्षिक योजनाओं तथा कार्यक्रमों के नियोजन एवं रूपरेखा तैयार करने के लिए शैक्षिक तकनीकी के प्रणाली विश्लेषण उपागम को व्यवहार में लाया जाता है।


9. दूरस्थ शिक्षा (Distance Education): दूरस्थ शिक्षा कार्यक्रम के लिए मोडयूल्स एवं मल्टीमीडिया सामग्री तैयार करना, ऑनलाइन कोर्स, वीडियो कांफ्रेंसिंग एवं वार्ता समूह (Discussion Forum) की व्यवस्था करना, ऑनलाइन सत्रीय कार्य एवं परीक्षा आदि इसके अंतर्गत आते हैं।