अति पूंजीकरण के प्रभाव - effects of over capitalization

अति पूंजीकरण के प्रभाव - effects of over capitalization


अति पूंजीकरण से निम्ननांकित क्षेत्रों में प्रभाव दिखाई देता है।


1. कंपनी पर प्रभाव


2 अंश धारकों पर प्रभाव


3. समाज पर प्रभाव


1. कंपनी पर प्रभाव - अति पूंजीकरण से कंपनी पर निम्नलिखित प्रभाव दिखाई दिए जाते है। 


अ) कंपनी का नाम खराब होता है। (Loss in Goodwill ) - अति पूंजीकरण में उत्पादन की क्षमता कम होती है। जिससे अंश बाजार में अंशों का मुख्य पुस्तकी मुख्यों से कम होता है।

अंश बाजार में अंश के मुख्य में ढलाण आने ने निवेश कर्ता कंपनी में निवेश करण्याने के लिए राजी नहीं होते। जिससे कंपनी का नाम खराब होकर, कंपनी में निवेबदार आकृष्ट नही होते।


ब) कंपनी पर भरोसे में घट (Loss in credit worthiness ) कंपनी में अतिपूजीकरण की स्थिती होने पर आय प्राप्ती के दर में कमी होती है। जिससे कंपनी को ऋण (Loan) प्राप्त करने के लिए आवश्यक व्याज दर देना कठिण होता है। जिससे बाजार में कपनी पर से भरोसा कम होता है एवं कंपनी की ईमेज कम होती है। 


क) पूंजी प्राप्ती में कठिणाईयाँ (Difficulties in obtaining capital) - अति पूंजीकरण की स्थिती में कपनिको अपने विकास एवं विस्तार की योजना कार्यान्वित करणे हेतु पूजी प्राप्त करने में कठिणाईयाँ आती है। क्योकी ऐसे कंपनी का आय प्राप्ती का दर कम होने के कारण निवेष की गई पूंजी मिलेंगी की संभावना निवेषदार को दिखती नही।