बाल्यावस्था में बच्चे में संवेगात्मक , सामाजिक विकास - Emotional, social development in a child during childhood
बाल्यावस्था में बच्चे में संवेगात्मक , सामाजिक विकास - Emotional, social development in a child during childhood
1) बच्चे के संवेग अधिक निश्चित और कम शक्तिशाली हो जाते हैं।
2) बच्चे के संवेगों को दमन करने की क्षमता आ जाती है।
3) बच्चे के संवेग पर विद्यालय के वातावरण का व्यापक प्रभाव पड़ता है। आदर्श, स्वतन्त्र, और स्वस्थ वातावरण उसके संवेगों का परिष्कार करता है। जबकि भय, आतंक और कठोरता के वातावरण में ऐसा होना असंभव है।
4) अप्रिय व्यवहार, शारीरिक दण्ड और कठोर अनुशासन बच्चे में मानसिक ग्रन्थियों का निर्माण कर देते है जो उसके संवेगात्मक विकास को विकृत कर देता है।
बाल्यावस्था में बच्चे का सामाजिक विकास
1) इस अवस्था में बच्चे प्राथमिक विद्यालय में प्रवेश करते हैं। वहाँ नए वातावरण से अनुकूलन करते हैं, नए मित्र बनाना सीखते हैं।
2) इस उम्र में बच्चे के व्यवहार में उन्नति और परिवर्तन आरम्भ हो जाता है। फलस्वरूप उनमें स्वतंत्रता, सहायता और उत्तरदायित्व के गुणों का विकास होता है।
3) बच्चा किसी टोली का सदस्य बनता है और सामाजिक कार्य में भाग लेता है।
4) टोली बच्चे के आत्म-नियन्त्रण, साहस, न्याय, सहनशीलता, नेता के प्रति भक्ति, दूसरों के प्रति सदभावना आदि गुणों का विकास करती है।
5) इस अवस्था में बच्चे शिक्षक एवं बड़ों को सम्मान देता है। बच्चे के बांछनीय या अवांछनीय व्यवहार में निरन्तर प्रगति होती रहती है।
वार्तालाप में शामिल हों