संवेगात्मक रूप से अशांत विद्यार्थियों - emotionally disturbed students

संवेगात्मक रूप से अशांत विद्यार्थियों - emotionally disturbed students

के अभिप्राय ऐसे विद्यार्थियों से है जो किसी अपनी एक या अन्य मनोविकारात्मक या व्यवहारजन्य परेशानियों (जिनके पीछे कोई आंगिक या शारीरिक कारण नहीं होते) के कारण इतने अधिक कुसमायोजित होते है कि उन्हें अपनी प्रगति का मार्ग अवरुद्ध मिलता है। इनकी परेशानियों एवं विकृति को ध्यान में रखकर सामान्यतः इन्हें जिन वर्गों में बांटा जाता है वे है अवसाद से पीड़ित बालक, चिंता मनोविकारों से ग्रस्त बालक, मनोदैहिक या मनो-विकृतियों के शिकार बालकः तथा व्यवहारजन्य विकारों से ग्रस्त बालक, इन बालकों को ऐसा बन जाने के लिए उत्तरदायी कारणों का प्रमुख रूप से वंशानुक्रम, जैविक तथा शारीरिक एव सामाजिक वातावरणजन्य कारकों के रूप में विभक्त किया जा सकता है। इनकों अपने समस्या ग्रस्त व्यवहार से निपटने में सहायता करने हेतु हम उपचारात्मक तकनीक के रूप में जिन चार चिकित्सा पद्धति को अपना सकते है, वे हैं - मनोगत्यात्मक व्यवहार, सामूहिक तथा परिवार चिकित्सा पद्धति। इनकी शिक्षा सामान्य विद्यालयों में सामान्य बालकों के साथ ही होना ठीक रहता है अलग विद्यालयों तथा कक्षाओं में नहीं। परंतु इसके उचित परिणाम तभी निकल सकते है जबकि इनकी व्यवहारजन्य समस्याओं को ध्यान में रखते हुए इनके ऊपर व्यक्तिगत ध्यान देने और मनोवैज्ञानिकों का परामर्श प्राप्त करते हुए उपयुक्त शिक्षा देने पर ठीक तरह सोचा जाता रहे।