पर्यावरण अवनयन , पर्यावरण अवनयन का प्रभाव - environmental degradation, impact of environmental degradation
पर्यावरण अवनयन , पर्यावरण अवनयन का प्रभाव - environmental degradation, impact of environmental degradation
जीवधारी अपने जीवन की क्रियाओं के संचालन हेतु विभिन्न परिस्थितियों से अनुकूलन का प्रयास करते हैं। प्रत्येक पारिस्थितिक कारक जीवों पर अपना प्रभाव प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से डालता है । किंतु वह अवस्था जब पर्यावरणीय कारकों का जीवों पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ता है, जिसके फलस्वरूप जीवधारियों का जीवन संकटमय हो जाता है, इस स्थिति को पर्यावरण अवनयन कहते हैं। विभिन्न कारक जैसे-जैवीय कारक, जलवायवीय कारक, मृदीय कारक, स्थिलाकृतिक कारक आदि विभिन्न रूपों में मिलकर जीवों पर अपना प्रभाव डालते हैं। जब इन कारकों का अपने नैसर्गिक गुणों के विपरीत जीवों पर प्रतिकूल प्रभाव दिखायी देने लगे तो जीव धारियों का जीवन संकटमय हो जाता है। पर्यावरण की इसी परिवर्तित स्थिति को पर्यावरण अवनयन या पर्यावरण ह्रास कहा जाता है।
पर्यावरण अवनयन का प्रभाव
पर्यावरण अवनयन का पारिस्थितिकी पर प्रत्यवक्ष प्रभाव पड़ता है जिसके फलस्वरूप पारिस्थितिक तंत्र में असंतुलन की स्थिति आ जाती है। पर्यावरण व मनुष्य की क्रियाओं में असंतुलन उत्पन्न हो जाता है। मनुष्य संसाधनों का अत्यधिक दोहन करते हुए जब पर्यावरण हो नष्ट करता है तो पर्यावरण व मनुष्य दोनों पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ता है।
पर्यावरण अवनयन की प्रक्रिया में प्राकृतिक व मानवीय दोनों कारक उत्तरदायी होते हैं । किंतु आज के युग के मानवीय गतिविधियाँ पर्यावरण को अधिक क्षति पहुँचाने का कार्य कर रही हैं जिसका परिणाम विभिन्न प्राकृतिक विकृतियों जैसे-बाद, सूखा, भूकम्प, प्रदूषण आदि के रूप में दिखायी देता है।
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