समान नागरिकता , मौलिक अधिकार - Equal Citizenship, Fundamental Rights

समान नागरिकता , मौलिक अधिकार - Equal Citizenship, Fundamental Rights

उनका मानना था कि अछूत प्रथा की समाप्ति को बहुमत की इच्छा पर नहीं छोड़ा जाए, बहुमत के शासन की स्थापना से पूर्व ही अछूतों को इस प्रथा से मुक्त कर दिया जाए। उन्हें नागरिकता का दर्जा देते हुए वे सभी नागरिक अधिकार दिए जाएं जो सामान्य रूप से अन्य नागरिकों को दिए गए हैं, जो लोकतांत्रिक पद्धति पर आधारित हो।

मौलिक अधिकार - अस्पृश्यता की समाप्ति तथा नागरिक समानता प्रदान करने के लिए निम्न मूल अधिकारों को संविधान का अभिन्न अंग घोषित किया जाना चाहिए। भारत में राज्य के सभी नागरिक कानून के समक्ष समान हैं तथा समान नागरिक अधिकारों का उपयोग करते हैं। विद्यमान ऐसा कोई भी नियम, विधान, आदेश, परम्परा या कानून की ऐसी व्याख्या जो राज्य के नागरिकों के साथ भेदभाव करती है या अस्पृश्यता पर आधारित दण्ड, हानि व निर्योग्यता आरोपित करती है तो वह संविधान के लागू होने के दिन से निष्प्रभावी होगी।