निबंधात्मक परीक्षा - Essay Type Examination
निबंधात्मक परीक्षा - Essay Type Examination
निबंधात्मक परीक्षा से हम सभी भली-भाँति परिचित हैं क्योंकि प्रायः सभी स्कूल एवं महाविद्यालयों में इनका ही प्रयोग होता है। इन परीक्षाओं की नींव अत्यंत गहरी है, इसलिए परीक्षाओं को रूढिवादी परीक्षाओं के नाम से भी पुकारा जाता है। निबंधात्मक परीक्षाओं में परीक्षार्थी किसी भी प्रश्न का उत्तर विस्तार से देता है, उत्तर की कोई सीमा निर्धारित नहीं की जाती तथा परीक्षार्थी अपने मौलिक विचारों को अभिव्यक्त करने में पूर्ण स्वतंत्र होता है। यद्यपि इन परीक्षाओं के माध्यम से परीक्षार्थी की विभिन्न मानसिक योग्यताओं, जैसे- रुचियों, क्षमताओं, अभिवृत्तियों, कौशलों आदि का सही मूल्यांकन सम्भव है, फिर भी, ये परीक्षाएँ मूलतः इस बात पर विशेष महत्व देती है कि परीक्षार्थी सुंदर लेख एवं भाषा-शैली के आधार पर तथ्यों को फिर से किस कुशलता के साथ प्रस्तुत कर पाता है।
1 निबंधात्मक प्रश्न (Essay Type Questions) निबंधात्मक प्रश्नों में निम्न रूपों का समावेश किया जाता है
(1) दीर्घ उत्तर प्रश्न ( Long Answer Question)- इस प्रकार के प्रश्नों के विस्तृत उत्तर दिए जाते हैं जिनकी कोई
सीमा निर्धारित नही की जाती. उदाहरणार्थ
[i] वोल्टीय सेल की रचना एवं कार्य-विधि समझाइए।
( 2 ) लघु उत्तर प्रश्न ( Short Answer Questions)- इस प्रकार के प्रश्नों का उत्तर परिक्षार्थी को शब्दों की कोई निश्चित सीमा अथवा साथ आठ पंक्तियों में देना होता है। उदाहरणार्थ
[i] ओम का नियम क्या है?
(3) अति लघु उत्तर प्रश्न (Very Short Answer- Question)-
इस प्रकार के प्रश्नों के उत्तर परिक्षार्थी को मात्र एक शब्द, पंक्ति या दो तीन वाक्यों में देना होता है। जैसे
[i] आयतन किसे कहते है?
[ii] बल का मात्रक क्या है?
2. निबंधात्मक परीक्षा के गुण (Merits of Essay Type Examination)
निबंधात्मक परीक्षाओं की सामान्य आलोचना के संदर्भ में यद्यपि यह कहना कोई महत्व नहीं रखता की यदि इन परीक्षाओं को सावधानीपूर्वक पूर्व-नियोजित ढंग से प्रयोग में लाया जाए तो प्रभावी परिणाम प्राप्त हो सकते हैं, फिर भी, इन परीक्षाओं में कुछ महत्वपूर्ण विशेषताएँ अवश्य है, जो निम्न है
1. अधिगम के बहुत से पहलू ऐसे हैं जिनका मूल्यांकन केवल निबंधात्मक परीक्षाएँ ही कर सकती हैं, अन्य परीक्षाएँ नहीं।
2. ये परीक्षाएँ उच्च मानसिक प्रकियाओं के मापन का सशक्त साधन है।
3. इन परीक्षाओं में परिक्षार्थी को विचारों की अभिव्यत्ति की पूर्ण स्वतंत्रता होती हैं।
4. इन परीक्षाओं से ज्ञान के गुणात्मक पक्षों, जैसे- शाब्दिक अभिव्यक्ति, भाषा पर अधिकार, साहित्यिक शैली, विचारों का प्रस्तुतीकरण आदि का उचित मूल्यांकन सम्भव है।
5. इन परीक्षाओं के प्रश्नों की रचना करना सरल कार्य है।
3 निबंधात्मक परीक्षाओं की सीमाएँ (Limitation of Essay Type Examination)
उपरोक्त विशेषताओं के अतिरिक्त इन परीक्षाओं की अपनी कुछ सीमाएँ भी हैं, जो इस प्रकार हैं 1. इन परीक्षाओं में जिन प्रश्नों का चयन किया जाता है वे संपूर्ण पाठ्यक्रम का प्रतिनिधित्व नहीं कर पाते।
2. ये परीक्षाएँ सुंदर लेख एवं परीक्षा युत्तियों (Examination Tactics) पर अधिक जोर देती है फलत: कभी-कभी परीक्षार्थी परीक्षक को धोखा देने में भी सफल हो जाता है।
3. परीक्षाएँ रटने(Cramming) पर बहुत अधिक बल देती है।
4. इन परीक्षाएँ के माध्यम से प्रतिभा का विकास धूमिल हो जाता है।
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