सार - essence

सार - essence

सतत परिवर्तनशील जीवन में व्यक्ति की आकांक्षाएं और इच्छाएं बदलती रहती है। व्यक्ति को अपनी आकांक्षाओं और समाज की अपेक्षाओं के साथ संतुलन बैठाना होता है। समायोजन का अर्थ होता है कि जीवन की आवश्यकताओं मांगों से अपनी शक्ति ओर सामर्थ्य के संदर्भ में अनुकूलन करके चलना । अतः जो इस प्रकार के मनोवैज्ञानिक अनुकूलन में जितना समर्थ है वह उतना ही अच्छी तरह अपनी संघर्षपूर्ण जिंदगी को जी सकता है । समायोजन के द्वारा एक ओर तो हम अपने आपको बदलती परिस्थितियों के अनुसार बदलने का प्रयत्न करते हैं तो दूसरी ओर समायोजन हमें ऐसी शक्ति और सामर्थ्य भी देता है कि हम परिस्थितियों को ही बदल डालें। समायोजन के लिए जहाँ अपने को बदलकर संतुलन बनाया जा सकता है अर्थात् दूसरे शब्दों से समझौता किया जा सकता है वहाँ ऐसा साहस भी किया जा सकता है कि परिस्थितियों को ही बदल कर अपने अनुकूल या इच्छा अनुसार कर लिया जाए।