मॉण्टेसरी पद्धति का मूल्यांकन - Evaluation of Montessori Method
मॉण्टेसरी पद्धति का मूल्यांकन - Evaluation of Montessori Method
गुण
1. छोटी उम्र के बच्चों के लिए यह विधि बड़ी उपयुक्त है।
2. बच्चों को वस्तुओं के प्रयोग करने में आनंद मिलता है।
3. मॉण्टेसरी व्यक्ति की महानता में विश्वास करती थी।
4. उनकी पद्धति में व्यक्तित्व के पूर्ण विकास पर ध्यान दिया जाता है।
5 मॉण्टसरी की पद्धति वैज्ञानिक है। वह अनुभव और निरीक्षण पर बल देती है।
7. उपकरणों द्वारा शिक्षा देने का उनका विचार सराहनीय है।
8. वे ज्ञानेंद्रियों की शिक्षा पर अधिक बल देती हैं। निस्संदेह, जानेंद्रियों से मस्तिष्क का विकास होता है।
9. लिखने की शिक्षा देने का उनका ढंग शिक्षार्थी के विकास के स्वरूप के अनुकूल है।
10. शिक्षार्थी को खेल बड़ा प्रिय होता है। मॉण्टेसरी पद्धति में खेल द्वारा शिक्षा दी जाती है।
11. उनका अनुशासन का विचार श्रेष्ठ है। उनके अनुसार अनुशासन बाहर से नहीं लादा जाता, बल्कि अंदर से विकसित किया जाता है।
दोष
1. इस पद्धति में केवल एक ही जानेंद्रिय की एक बार शिक्षा दी जाती है।
जानेंद्रिय की पृथक् शिक्षा संकाय मनोविज्ञान (Faculty Psychology) पर आधारित होती है। किंतु इस सिद्धांत का मनोविज्ञान में अब परित्याग हो चुका है।
2. कहने को तो इस पद्धति में स्वतंत्रता है, किंतु एक समय में एक उपकरण को देकर शिक्षार्थी की स्वतंत्रता को हम सीमित कर देते हैं।
3. इस पद्धति द्वारा शिक्षार्थी में सामाजिक गुणों का विकास नहीं हो पाता है।
4. इस पद्धति में समय बहु तनष्ट होता है।
5. यह पद्धति अधिक खचली है, अतः गरीब समाज में लागू करना कठिन होता है।
6. इस पद्धति में शिक्षार्थी से कुछ तो ऐसे कार्य कराए जाते हैं जो उसकी अवस्था के अनुकूल नहीं कहे जा सकते।
7. विलियम किलपैट्रिक (Kilpatrick) का कहना है कि इस पद्धति में शिक्षार्थी के व्यक्तित्व के विकास पर बल दिया जाता है, किंतु उसके सामाजिक विकास पर यथोचित ध्यान नहीं दिया जाता, अतः विकास एकागी होगा।
8. स्टर्न (Stern) का कहना है कि शैक्षिक उपकरणों से बुद्धि का एकांगी विकास होता है। रंग, रूप, ध्वनि पर अलग-अलग बल देने से मस्तिष्क के स्वाभाविक विकास में बाधा पड़ती है।
9. स्प्रंगर (Spranger) का कहना है कि मॉण्टसरी पद्धति में काल्पनिक खेलों की उपेक्षा की गई है। शिक्षार्थी की असतुष्ट मूलप्रवृल्लियों का रचन (Catharsis) इन्हीं काल्पनिक खेलों से होता है। इस रेचन के अभाव में भावना ग्रन्थियों के बनने का भय होता है।
10. हसन (Hessen) का कहना है कि मॉण्टेसरी पद्धति में खेल के वास्तविक सिद्धांत का अभाव है। खेल खेल के लिए हो, तभी वह खेल होगा अन्यथा कार्य हो जाएगा।
11. मॉण्टेसरी पहले लिखना सिखाना चाहती थीं, यह प्रश्न विवादास्पद है।
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