मूल्यांकन - Evaluation
मूल्यांकन - Evaluation
"मूल्यांकन किसी सूचना या आकड़े की विश्वसनीयता, यथार्थता तथा परिशुद्धता की जाँच करता है।" (Dictionary of Military and Associated Terms)
“मूल्यांकन किसी समाप्त हो गए या चल रहे गतिविधि के उत्तरदायित्व, प्रभावकारिता तथा क्षमता का निर्धारण करती है।” (Business Dictionary.com)
इस प्रकार मूल्यांकन की प्रक्रिया का सामान्य लक्ष्य किसी प्रक्रिया, योजना, कार्यक्रम या गतिविधि के विभिन्न साझेदारों को महत्त्वपूर्ण प्रतिपुष्टि प्रदान करना है। यह विद्यार्थियों के अधिगम के संबंध में उपयोगी तथा व्यावहारिक प्रतिपुष्टि प्रदान करने की प्रक्रिया है।
इस प्रक्रिया में आकलन द्वारा संग्रहित आकड़ों की वैधता का सत्यापन किया जाता है, तदुपरांत इन आकड़ों का विश्लेषण किया जाता है तथा इस प्रकार प्राप्त तथ्यों के आधार पर यह ज्ञात किया जाता है की अधिगम उद्देश्यों की पूर्ति हुई है या नहीं? इस प्रक्रिया द्वारा विद्यार्थियों के अधिगम में गुणात्मक विकास तथा शिक्षण-अधिगम प्रक्रिया में तदनुसार सुधार के लिए आवश्यक निर्णय लिए जाते हैं। यह निष्कर्ष निकाला जाता है कि विद्यार्थियों के अधिगम का स्तर क्या है? वे कितना तथा कैसे सीखते हैं? यदि वे सीख नहीं पाते तो क्यों सीख नहीं पाते? अंततः यह निर्धारित किया जाता है कि उनके अधिगम में सुधार के लिए किन शिक्षाशास्त्रीय विधियों तथा युक्तियों को व्यवहार में लाना चाहिए?
एन.सी.ई.आर.टी. की कांसेप्ट ऑफ़ इवैल्यूएशन (Concept of Evaluation ) नामक पुस्तक में मूल्यांकन प्रक्रिया द्वारा हमें अग्रांकित तीन बातों का पता चलता है-
1. अधिगम उद्देश्यों की पूर्ति किस सीमा तक हुई है?
2. शिक्षण-अधिगम प्रक्रिया कितनी प्रभावशाली है?
3. शिक्षण-अधिगम व्यवस्था में क्या सुधार किया जाए कि अधिगम उद्देश्यों की पूर्ति सुनिश्चित की जा सके? किसी विषय-वस्तु की उपयुक्तता के संबंध में निर्णय लेने की प्रक्रिया मूल्यांकन के आधार पर ही की जा सकती है। मूल्यांकन उद्देश्यों के अनुरूप ही किया जाता है क्योंकि शिक्षा के उद्देश्य एवं मूल्यांकन में एक अत्यन्त गहरा संबंध होता है या तो हम कह सकते हैं कि उद्देश्यहिन मूल्यांकन निरर्थक एवं अनुपयुक्त है। उद्देश्यों के संदर्भ में किए गए मूल्यांकन से ही प्रगति का ज्ञान होता है। शिक्षा व्यवस्था में पाठ्यक्रम, अध्यापन एवं अध्ययन आदि अमूर्त अवधारणाओं से संबंधित मूल्यांकन शब्द का प्रयोग किया गया है।
इसलिए इसे शैक्षिक मूल्यांकन' कहा जाता है। शैक्षिक मूल्यांकन द्वारा केवल विद्यार्थियों की शैक्षिक उपलब्धि की ही प्रतिपुष्टि नहीं होती बल्कि अध्यापक के अध्यापन प्रभाव का भी मूल्यांकन होता है। अगर किसी छात्र ने 70 प्रतिशत अंक प्राप्त किया है तो वह उसके अपने प्रयासों का परिणाम हो सकता है; परंतु 30 प्रतिशत जो कमी रह गई है तो वह संबंधित अध्यापक के अध्यापन का अपयश हो सकता है। इस दृष्टिकोण से यदि मूल्यांकन का अर्थ समझने का प्रयास किया जाए तो अध्यापक अपने अध्यापन मे स्वयं परिवर्तन या सुधार कर सकता है। इस दृष्टि से शैक्षिक मूल्यांकन की यथोचित परिभाषा निम्नलिखित शब्दों में की जा सकती है।
“शिक्षा के विभिन्न स्तर के शैक्षिक उद्देश्यों के संदर्भ में विद्यार्थी के अध्ययन प्रगति के मापन पर पूर्व निर्धारित मूल्यों के आधार पर अभिप्राय देना ही शैक्षिक मूल्यांकन है." "Educational evaluation is the predetermined value based remarks on the measurement of educational achievement of a student in the context of educational objectives at various educational levels."
प्रस्तुत परिभाषा से शैक्षिक मूल्यांकन की जो विशेषताएँ प्रतिबिंबित होती हैं वे निम्नलिखित हैं।
1) मूल्यांकन मापन द्वारा प्राप्त आंकड़ों का विश्लेषण कर मूल्य निर्धारण करने की प्रक्रिया है।
2) मूल्यांकन में विद्यार्थियों के शैक्षिक उपलब्धि की प्रगति पर बल दिया जाता है।
3) मूल्यांकन के लिए पूर्व निर्धारित मूल्यों की आवश्यकता होती है।
4) मूल्यांकन शैक्षिक उद्देश्यों के संदर्भ में ही किया जाता है।
मूल्यांकन का वास्तविक अर्थ मूल्य निर्धारण ही है।
विद्यार्थी के शैक्षिक प्रगति का जब मापन किया जाता है तो वह केवल संख्यात्मक मापन होता है। उसे प्राप्तांक (Score) कहते हैं। संख्यात्मक मापन परीक्षा के माध्यम से किया जाता है। परीक्षा के परिणाम प्राप्त होने के बाद विद्यार्थी को जितने प्राप्तांक मिलते हैं वह केवल शैक्षिक मापन हो सकता है, परंतु उस प्राप्तांक की जब पूर्व निर्धारित मूल्यों के संदर्भ में तुलना करते हुए उसका अर्थ निर्वचन करते हुए प्राप्तांको का सही आकलन किया जाता है और उसके आधार पर अभिप्राय दिया जाता है, तब मूल्यांकन की प्रक्रिया पूर्ण होती है। अतः मापन किए गए प्राप्तांको की तुलना पूर्व निर्धारित मूल्य का संदर्भ देकर करना और उसका सही अर्थ निकालकर उस पर उचित अभिप्राय देना ही मूल्यांकन है। इसी बात को हम गणितीय रूप में भी प्रस्तुत कर सकते हैं, जो अग्रलिखित है।
• मूल्यांकन (Evalution) = प्राप्तांक (Score) + अभिप्राय ( Remarks)
मूल्यांकन का वास्तविक अर्थ मूल्य निर्धारण ही है। छात्र द्वारा अर्जित शैक्षणिक प्रगति या उपलब्धि का प्राप्तांको के रूप मे संख्यात्मक मापन करने के बाद उसका मूल्य निर्धारण कर उन प्राप्तांको का उचित स्थान निश्चित किया जाता है। इस प्रक्रिया को मूल्य निर्धारण प्रक्रिया कहते है। उदाहरण- पूर्व निर्धारित उत्तीर्णांक 30 है और विद्यार्थी को उससे अधिक अंक मिले तो उसका स्थान उत्तीर्ण छात्रों में होगा। प्रथम श्रेणी प्राप्त करने का पूर्व निर्धारित मूल्य 60 है; और विद्यार्थी को उससे अधिक अंक मिले तो उसका स्थान प्रथम श्रेणी के छात्रों में होगा। शैक्षिक मूल्यांकन द्वारा विद्यार्थियों में किस दिशा में और कहाँ तक परिवर्तन हुआ या हो रहा है, इसका अनुमान लगाया जा सकता है। शैक्षिक पाठ्यक्रम के उद्देश्य कहाँ तक सफल हुए है, यह समझ सकते हैं तथा विद्यार्थियों ने कितनी शैक्षिक प्रगति प्राप्त की है, इसका भी ज्ञान होता है। शैक्षिक मूल्यांकन मात्र शैक्षिक उपलब्धि से ही नहीं बल्कि शैक्षिक सुधारों से भी संबंधित है।
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