अनुभव - Experience
अनुभव - Experience
सभी के व्यक्तिगत अनुभव ज्ञान के सब से आदिम सर्वविदित और मौलिक (fundamental) स्रोत रहे हैं। पुराने काल में बंजारे व बहुत सी जनजातियों को अपने अनुभवों के आधार पर यह जान रहता था कि कौन से जंगली फल उन्हें नुकसान करते हैं या अनाज किस मौसम में पक जाते हैं। वह इस बात को भी समझते थे कि वर्षा का पानी पहाड़ी पर नहीं रुक सकता और इसी कारण वर्षा ऋतु में नदियों में अचानक बाढ़ आ जाती है। जब भी कोई ऐसी समस्या खड़ी होती है तो मनुष्य अपने व अन्य व्यक्तियों के इन्ही अनुभवों के आधार पर उसका निदान पाने की चेष्टा करता है। बच्चे बहुधा अपनी जिज्ञासाओं को शान्त करने के लिए अपने शिक्षकों, माता-पिता या अन्य बड़े-बूढ़ी से प्रश्न करते हैं। अपने या अन्य लोगों के व्यक्तिगत अनुभवों से ज्ञान प्राप्त करना एक सुविधाजनक विधि है मगर उसे बिना जाँच पड़ताल के सहज ही मान लेने से लिए गए निर्णय गलत भी हो सकते हैं।
लेखक वाल डालेन 1973) के अनुसार-
किसी व्यक्ति द्वारा प्रेक्षण में या जो देखा है अथवा किया है, उसके वर्णन करने में गलती हो सकती है। 1. वह ऐसे साक्ष्यों को अनदेखा कर सकता है जिनसे वह स्वयं सहमत नहीं है।
2. ऐसे माप यंत्रों का प्रयोग करें जिनमें व्यक्तिनिष्ठ आकलन की आवश्यकता हो ।
3. अपूर्ण साक्ष्यों के आधार पर विश्वास कर ले।
4. परिस्थिति विशेष से संबंधित महत्वपूर्ण कारकों पर ध्यान न दें।
5. पूर्वाग्रहों के कारण अनुपयुक्त निष्कर्ष निकाल ले।
उपरोक्त टिप्पणियों को ध्यान में रखते हुए अनुभवों को सावधानीपूर्वक प्रयोग करके विश्वसनीय जान का साधन बनाया जा सकता है।
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