समस्या समाधान को प्रभावित करने वाले कारक - factors affecting problem solving

समस्या समाधान को प्रभावित करने वाले कारक - factors affecting problem solving


हम सभी किसी-न-किसी रूप में जिन्दगी के हर मोड़ पर विविध प्रकार की समस्याओं का शिकार होते रहते हैं। हमारी हर तरह से यही कोशिश रहती है कि हम समस्या विशेष का शिकार होने पर उसका उचित समाधान खोज निकालें । समस्या समाधान में हमें मिलने वाली सफलता या असफलता के पीछे बहुत सी बातें कार्य करती हैं। ये वे ही बातें हैं जिन्हें समस्या समाधान को प्रभावित करने वाले कारकों का नाम दिया जाता है। ऐसे कारकों में से कुछ प्रमुख कारकों की चर्चा हम नीचे करने जा रहे हैं।


समस्या समाधान को प्रभावित करने वाले कारकों को हम मुख्य रूप से दो वर्गों में विभाजित करके समझ सकते हैं। प्रथम वर्ग में ऐसे कारक होते हैं जिनका सम्बन्ध समस्या विशेष की प्रकृति से होता है

तथा दूसरे वर्ग में ऐसे कारक आते हैं जिनका सम्बन्ध समाधानकर्ता की प्रकृति तथा उसके समस्या समाधान सम्बन्धी व्यवहार से होता है।


1. समस्या विशेष की प्रकृति से सम्बंधित कारक- अगर इस प्रकार के कारकों के बारे में सोचा जाए तो कुछ निम्न प्रकार के कारक समस्या समाधान को प्रभावित करने में सशक्त भूमिका निभाते दिखाई दे सकते हैं:


✓ समस्या का सरल या जटिल होना।


✓ समस्या का आकार में छोटा या बड़ा होना।


✓ समस्या का उपयुक्त रूप से पारिभाषित होना या न होना।


✓ पूर्व में हल की गयी समस्याओं से उसकी तुल्यता होना या न होना।


✓ समस्या के हल में वर्तमान उपलब्ध परिस्थितियों में मिलने वाली सहायता का स्वरुप। समस्या समाधान के लिए आवश्यक उपकरण सामग्री व अन्य ज़रूरतों के पूरा न होने पर समस्या समाधान में पड़ने वाला प्रभाव।


2. समाधानकर्ता से सम्बंधित कारक- इस वर्ग में ऐसे कारक आते हैं जिनका सम्बन्ध समाधानकर्ता की प्रकृति, उसके अधिगम एवं प्रशिक्षण स्तर तथा उसके समस्या समाधान व्यवहार से होता है। इस प्रकार के कुछ प्रमुख कारक निम्न हो सकते हैं:


i. पूर्व अधिगम एवं प्रशिक्षण का स्तर समाधानकर्ता का समस्या विशेष के सन्दर्भ में अर्जित अधिगम अनुभवों या प्रशिक्षण का क्या स्वरुप तथा स्तर है इस बात पर प्रस्तुत समस्या के समाधान का भविष्य निर्भर करता है।


ii. समाधानकर्ता की रुचि और अभिप्रेरणा स्तर समस्या विशेष को समाधानकर्ता द्वारा कितनी गंभीरता से लिया जा रहा है, यह उसकी किस प्रकार की आवश्यकताओं, रुचियों तथा अभिप्रेरकों की संतुष्टि में सहायक बन रही है तथा वह किस रूप में इसका समाधान ढूंढने के लिए तत्पर या अभिप्रेरित है इन सभी बातों पर समस्या के समाधान का काफी कुछ भविष्य निर्भर करता है। 


iii. समाधानकर्ता द्वारा समस्या का विश्लेषण- समाधानकर्ता समस्या विशेष को किस ढंग से अध्ययन करके उसका किस रूप में विश्लेषण करता है इस बात पर समस्या का सही समाधान बहुत कुछ निर्भर करता है। बहुत से समाधानकर्ता समस्या का बिना अध्ययन किए ही उसके समाधान में जुटने की गलती कर बैठते हैं।

इसके विपरीत जो समाधानकर्ता अच्छी तरह समस्या का मनन करके तथा उसे भली-भांति समझने और जानने का प्रयास करके ही आगे बढ़ते हैं उन्हें समस्या समाधान में अधिक सफलता मिलती है।


iv. मानसिक विन्यास समस्या समाधान में समाधानकर्ता के मानसिक विन्यास का भी काफी गहरा अनुकूल तथा प्रतिकूल प्रभाव पड़ता है। मानसिक विन्यास से तात्पर्य किसी व्यक्ति द्वारा किसी परिस्थिति, संरचना या समस्या का अपनी विशेष मानसिकता के सन्दर्भ में अवलोकन करना होता है। हम जिस प्रकार से किसी परिस्थिति विशेष में अपनी समस्याओं को हल करने के आदी होते हैं, उसी तरह की परिस्थितियों का सामना होने या समस्याओं से घिर जाने पर हम अपनी स्मृति या आदतों पर आधारित वैसी ही क्रियाएँ करना चाहते हैं जिनसे हमें पहले समस्या समाधान में सफलता मिली थी। हमारा मानसिक झुकाव तथा प्रवृत्ति किसी समस्या विशेष के समाधान हेतु एक विशेष प्रकार की बन जाती है और बार-बार उसी तरह से समस्या का समाधान करने की ओर प्रवृत्त रहते हैं।


V. कार्यात्मक स्थिरता कार्यात्मक स्थिरता से तात्पर्य किसी वस्तु या विचार विशेष को प्रयोग में लाते रहने सम्बन्धी रूढ़िवादिता से है। हम जिस विचार या वस्तु को जिस ढंग से उपयोग में लाते रहे हैं उसको उसी तरह उपयोग में लाते रहने की हमारी आदत पड़ जाती है और इस आदत से लाचार हम उसके किसी अन्य प्रकार के प्रयोग के बारे में सोचना भी नहीं चाहते। हमारी इस प्रकार की सोच इस बात में तो हमारे लिए उपयोगी सिद्ध होती है कि समस्या समाधान से जुडी हुई वस्तुओं तथा विचारों का कैसा और क्या उपयोग किया जाए ऐसा सोचने में हमारा समय बर्बाद नहीं होता परन्तु इसका एक बड़ा नुकसान यह होता है कि उस वस्तु या विचार विशेष को हम और किसी ढंग से उपयोग नहीं कर पाते जबकि ऐसा होना संभव होता है। हमारी वस्तु या विचार विशेष को एक ही तरह उपयोग में लाते रहने सम्बन्धी कार्यात्मक स्थिरता (Functional Fixedness) यहाँ आड़े आ जाती है और परिणामस्वरूप हमारे समस्या समाधान सम्बन्धी व्यवहार का मार्ग अवरुद्ध हो जाता है।


vi. समाधानकर्ता की मानसिक एवं शारीरिक दशा- समाधानकर्ता की समस्या समाधान करते समय जिस प्रकार की मानसिक तथा शारीरिक अवस्था होगी उसका अनुकूल तथा प्रतिकूल प्रभाव उसके समस्या समाधान व्यवहार पर ज़रूर पड़ेगा।

शारीरिक तथा मानसिक रूप से चुस्त, सजग, सक्षम तथा क्रियाशील होने पर उसका समस्या समाधान व्यवहार पर हर प्रकार से अनुकूल प्रभाव ही पड़ेगा जबकि विपरीत अवस्था में समस्या समाधान में अड़चनें खड़ी हो जाएंगी। चिंता अगर सीमा में रहती है तो उससे समस्या समाधान के लिए आवश्यक अभिप्रेरणात्मक वातावरण तैयार हो सकता है परन्तु सीमा से बाहर जाते ही यह चिन्तन को अवरुद्ध करके समस्या समाधान में बाधाएँ खड़ी कर सकती है यही बात संवेगों के लिए भी है। संवेगों का अनुकूल बहाव समस्या समाधान की बहुत-सी बाधाओं को अनायास ही पार करता जाता है, परन्तु इनका अनुचित एवं अनियंत्रित प्रकाशन समस्या समाधान व्यवहार में बहुत सारी रुकावटें खड़ी कर सकता है।


vii. समस्या समाधान के लिए मिलने वाला समय- प्रत्येक समस्या अपनी प्रकृति के हिसाब से अलग-अलग कम या ज्यादा समय चाहती है। जितने समय की समस्या समाधान के लिए।

वास्तविक रूप में आवश्यकता है अगर उसे उतना नहीं मिल पाता तो अधिक शीघ्रता में समस्या समाधान का कार्य प्रतिकूल रूप से प्रभावित होगा। समस्या समाधान में दूसरी जो बात विशेष रूप से सहायक या अनुकूल सिद्ध होती है वह समाधान करते समय समाधानकर्ता को मिलने वाले विश्राम से है। इस प्रकार के विश्राम से समस्या समाधान कार्य में बहुत लाभ हो सकता है। मनोवैज्ञानिक भाषा में इसे इन्क्यूबेशन (Incubation) का नाम दिया जाता है।


viii. इस प्रकार समस्या समाधान को प्रभावित करने वाले कारक या तत्व, समस्या को हल करने के समय की परिस्थितियों तथा समस्या को हल करने वाले व्यक्ति तीनों की ही प्रकृति तथा विशेषताओं से जुड़े रहते हैं। इन सभी तत्वों तथा कारकों में से जो बातें सबसे अधिक महत्वपूर्ण सिद्ध होती हैं उनमें समाधानकर्ता की अपनी मानसिक और शारीरिक दशा, समस्या के प्रति उसकी चेतना तथा अभिप्रेरणा, समस्या के सन्दर्भ में उसका पूर्व ज्ञान, प्रशिक्षण तथा समस्या का समाधान ढूंढने की उसकी संकल्प शक्ति तथा आत्मविश्वास आदि बातें सभी प्रकार की समस्याओं के समाधान में समाधानकर्ता को सदैव ही उचित सहायता करते हैं।