रचनात्मक आकलन - formative assessment
रचनात्मक आकलन - formative assessment
विद्यार्थी साक्षात्कार- इसमें बच्चों से प्रश्नों के उत्तर मौखिक रूप से देने की अपेक्षा की जाती है। ये प्रश्न- शृंखलाएँ उनकी समझ के विस्तार और गहराई का अनुमान लगाने के लिए एक-दूसरे से जुड़ी होती हैं। अवलोकन- कक्षा में चक्कर लगाते हुए शिक्षक काम में लगे हुए बच्चों का अवलोकन करते हैं और उनके काम में उन्हें दिशा निर्देश देते हैं व उनकी मदद करते हैं। इससे शिक्षक को समूह या व्यक्तिगत कार्य को व्यापक रूप में समझने में मदद मिलती है।
प्रश्न पूछना - कक्षा में आमतौर पर इस विधि का प्रयोग किया जाता है। शिक्षण की प्रक्रिया के दौरान प्रश्न पूछने से शिक्षक को बच्चे के ज्ञान की जानकारी मिलती है। इससे शिक्षक व बच्चे दोनों को तत्काल फीडबैक मिल जाता है और शिक्षण में बदलाव के लिए गुंजाइश भी रहती है।
चर्चाएँ- कक्षा में चर्चा शुरू करने के लिए शिक्षक मुक्त प्रश्न पूछ सकते हैं और बच्चे उस पर विचार-विमर्श कर सकते हैं। इसका उद्देश्य समीक्षात्मक सोच और रचनात्मक सोच के कौशलों का विकास करना है।
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