समान अधिकारों का स्वतंत्र उपयोग , विधायिका में पर्याप्त प्रतिनिधित्व - free use of equal rights, adequate representation in the legislature
समान अधिकारों का स्वतंत्र उपयोग , विधायिका में पर्याप्त प्रतिनिधित्व - free use of equal rights, adequate representation in the legislature
समान अधिकारों के उपयोग में निस्संदेह दलितवर्ग को रूढ़िवादी समाज के विरोध का सामना करना पड़ेगा। ऐसे में यदि अधिकारों की घोषणा मात्र धार्मिक प्रवचन ना होकर हकीकत हो तो दलितों द्वारा प्रयुक्त अधिकारों में किसी भी प्रकार के हस्तक्षेप के विरूद्ध दण्ड व्यवस्था द्वारा संरक्षण दिया जाए।
विधायिका में पर्याप्त प्रतिनिधित्व-
अपने हितों की रक्षा के लिए दलितों को पर्याप्त राजनीतिक अधिकार दिए जाएं ताकि वे विधायिका तथा कार्यपालिका को प्रभावित कर सके। इसके लिए निर्वाचन संबंधी कानून में निम्न व्यवस्था की जानी चाहिए। देश के केन्द्रीय और प्रान्तीय विधायिकाओं में दलितों को उचित प्रतिनिधित्व का अधिकार, अपने प्रतिनिधित्व के रूप में दलित वर्गों द्वारा ही साथियों का चुनाव, चुनाव का आधार वयस्क मताधिकार, प्रथम दस वर्षों के लिए पृथक् निर्वाचन तथा तत्पश्चात् आरक्षित स्थानों सहित संयुक्त निर्वाचन।
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