शिक्षा के कार्य तथा उद्देश्य - Functions and Aims of Education
शिक्षा के कार्य तथा उद्देश्य - Functions and Aims of Education
प्लेटो ने शिक्षा को सम्पूर्ण सृष्टि की प्रक्रिया का एक आवश्यक अंग माना है। शिक्षा की असीम शक्ति को प्लेटो स्वीकार करता है। प्लेटो के अनुसार शिक्षा के प्रमुख उद्देश्य निम्नलिखित हैं -
1. शिक्षा का प्रथम उद्देश्य राज्य की एकता की रक्षा करना है। सोफिस्टों ने यूनान में व्यक्तिवाद को प्रमुखता दी थी। प्लेटो ने व्यक्ति एवं राज्य के संबंध का सुंदर दार्शनिक विवेचन किया और स्पष्ट किया कि व्यक्ति राज्य के लिए है। इकाई का अस्तित्व पूर्णके लिए होता है। राज्य की स्थिति पूर्णता की है अतः व्यक्ति को राज्य की बेदी पर अपने स्वार्थो को न्योछावर करने के लिए तैयार रहना चाहिए। अतः शिक्षा का प्रमुख कार्य है कि वह बालकों में सहयोग की भावना उत्पन्न करे समुदाय के प्रति विश्वास जगाए एवं भातृत्व के भाव का विकास करे। इससे यह विदित होता है कि प्लेटो एथेन्स से अधिक स्पार्टा की ओर झुका हुआ था।
2. शिक्षा का द्वितीय उद्देश्य नागरिकता के गुणों का विकास करना है। अच्छे राष्ट्र के निर्माण के लिए अच्छे नागरिकों की आवश्यकता होती है अतः अच्छे नागरिक के गुणों का विकास करना शिक्षा का मुख्य कार्य है। इस कार्य को करने के लिए युवकों में सयम साहस एवं सैनिक कुशलता प्रदान करना चाहिए।
3. सुकरात ने कहा था कि सद्गुण के विकास के लिये जान आवश्यक है। प्लेटो ने बुद्धिमत्ता को सद्गुण का पद दिया है। प्लेटो के अनुसार बिवेक ही सामाजिक व्यवस्था की नीव है। यह विवेक प्रत्येक शिशु में सुषुप्तावस्था में विद्यमान रहता है अतः शिक्षा का यह भी उद्देश्य है कि इस विवेक को जागृत किया जाए। बिवेक से ही जीवन नियंत्रित हो सकता है। जब तक विवेक जागृत न हो जाए तब तक शिशु को बड़ों के ही नियंत्रण में रखा जाए।
4. शिक्षा का चौथा उद्देश्य सत्यम, शिवम एवं सुंदरम के प्रति आस्था उत्पन्न करना है। जन्म के समय शिशु इन्द्रियों का दास होता है। अतः धीरे-धीरे उसमें सत्यम शिवम एवं सुंदरम के प्रति प्रेम उत्पन्न करना चाहिए।
5. प्लेटो के अनुसार जीवन में कई विरोधी तत्व विद्यमान रहते हैं। इन विरोधी तत्वों को पहचानना एवं इनमें संतुलन स्थापित करना शिक्षा का एक प्रमुख उद्देश्यहै।
6. शिक्षा का उद्देश्य एक अच्छे व्यक्तित्व का निर्माण करना है। अच्छा व्यक्तित्व संतुलित होता है तथा वह स्व के नियंत्रण में रहता है।
स्वनियंत्रित व्यक्ति विभिन्न परिस्थितियों के अनुकूल आचरण करने की योग्यता रखता है। अनुकूलन की यह योग्यता शिक्षा के द्वारा ही संभव है।
7 प्लेटो सामाजिक वर्गों का पक्षपाती था। उसके अनुसार समाज में तीन वर्ग मुख्य हैं। पहलावर्ग संरक्षकों का है, दूसरा सैनिकों का और तीसरा व्यवसायियों का। यूनानी समाज में उस समय दास प्रथा प्रचलित थी और यूनान में अनेक दास विद्यमान थे। प्लेटो ने इन दासों की स्थिति को यथावत स्वीकार कर लिया था। इस प्रकार प्राचीन भारतीय समाज की भाँति प्लेटो भी चार वर्णों में विश्वास करता था। भारतीय विचारधारा एवं प्लेटो की विचारधारा में इस अद्भुत समानता के विषय में कुछ विचारकों का कहना है कि प्लेटो भारत आया था और उसके विचारों पर भारतीय वर्णव्यवस्था की छाप पड़ी थी। प्लेटो के अनुसार शिक्षा का कार्य प्रत्येक व्यक्ति को इस योग्य बनाना है कि वह अपने अनुकूल सामाजिक वर्ग का सक्षम सदस्य बन सके।
8. शिक्षा का अंतिम उद्देश्य मानव शिशु को मानव बनाना है। उसमें मानवता के गुणों का विकास करना है।
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