वित्तीय प्रबंधक के कार्य - functions of financial manager

वित्तीय प्रबंधक के कार्य - functions of financial manager


व्यावसायिक संगठन के आर्थिक स्थिती का जायजा (विचार करके) लेकर वित्तीय मांग की पूर्तता करने एवं व्यवसाय के वित्तीय मांगों की प्राधान्यक्रम सुनिश्चित करने का कार्य विन्तीय प्रबंधक द्वारा किया जाता है। विभिन्न मार्गों से वित्त एवं पूंजी जमा करने, उसका उचित मात्रा में निवेश करने तथा व्यय पर नियंत्रण रखने जैसे महत्वपूर्ण कार्य वित्तीय प्रबंधक द्वारा किए जाते हैं। महत्तम लाभ एव संपत्ती प्राप्त करना इस व्यवसाय संगठन के उद्देश को हासिल करने के लिए वित्तीय प्रबंधक विभिन्न प्रकार की नितीयाँ एवं रणनितीयाँ तयार करते है। इन्हीं कारणों से वित्तीय प्रबंधक का स्थान, व्यवसाय संगठन में उच्च प्रबंधन वाले स्तर पर होता है। आधुनिक स्थिती में व्यापार एवं उद्योग की उन्नती वित्त प्रबंधक पर ही अवलंबित है। व्यावसायिक क्रियाओं की सफलता मुख्य रूप से वित्तीय प्रबंधक पर निर्भर करती है। वित्तीय प्रशासन का सपूर्ण दायित्व उसके कार्यक्षेत्र में आता है। वित्तीय प्रबंधक के कार्यों का अध्ययन हम निम्नलिखित के आधार पर कर सकते है।


1. प्रशासकीय कार्य- वित्तीय प्रबंधक का स्थापन उच्च प्रबंधन वाले स्तर में होता है। व्यावसायिक संगठन के लक्ष हासिल करने के लिए उन्हें विभिन्न प्रकार की नितीयाँ एव रणनितीयाँ तयार करने का कार्य करते है। व्यावसायिक संगठन के आर्थिक स्थिती का मुनाना करने दिर्घकालिन एवं अल्पकालिन वित्तीय योजना तथा बजट निर्माण का कार्य वित्तीय प्रबंधक करते हैं। व्यावसायिक संगठन के वित्तीय विभाग में कार्यरत सभी कर्मी जैसे की कॉरीअर लेखापाल, ऑडिटर, निरिक्षक, नियंत्रक एवं विभिन्न प्रबंधकों के कार्यों, अधिकारों एवं दायित्वों का निर्धारण का कार्य वित्तीय प्रबंधक द्वारा किया जाता है। 


2. वित्तीय मांग का पूर्वानुमान कार्य वित्तीय प्रबंधक को व्यावसायिक संगठन के अल्पकालिन एवं दिर्घकालिन वित्तीय मांग का पूर्वानुमान करना आवश्यक होता है। वर्तमान मांग के साथ-साथ भविष्यकालिन मांग की भी संभावना देखणी पड़ती है।


3. पूंजी प्राप्ती एवं प्रबंधक कार्य- व्यावसायिक संगठन के लिए उचित मात्रा में वित्त की प्राप्ती करना एवं अतिरिक्त पूंजी जमा भी न हो इसका पूरा ख्याल रखना वित्तीय प्रबंधक करता है। प्राप्त राशी का उचित विनियोग करते हुए व्यावसाय के लिए दैनिक कार्य सुचारू रूप से संचालन करने हेतु आवश्यक कार्यशिल पूंजी प्रबंधन करना उसका कार्य है।


4. पूंजी संरचना कार्य- व्यावसाय के लिए अनिवार्य पूंजी का कितना हिस्सा अंश पूजी, प्रतिभूतियाँ एवं ऋणपत्रों में विभाजीत किया जाना है यह अनुमान निश्चित करने को पूंजी सरचना कहते है। यह कार्य वित्त प्रबंधन द्वारा किया जाता है।


5. वित्तीय स्रोतों का चयन पूंजी की संरचना निश्चित होने के पच्छात उसके लिए आवश्यक स्रोतों का चयन करने का कार्य वित्तीय प्रबंधक द्वारा किया जाता है।

वित्तीय स्रोतों का चयन करते समय वित्त की मांग, प्रयोजन, उद्देश एवं उसे प्राप्त करने हेतु होने वाला व्यय इन सभी तत्वों का बड़ी सावधानी से विचार कर वित्ती प्रबंधक वित्तीय स्रोतों का चयन करने का कार्य करता है।


6. विनियोग का चयन कार्य पूंजी प्राप्ती की व्यवसाय के उपरान्त प्राप्त निधी उचित उद्देश एवं हेतु से आवश्यकता के अनुसार विनियोग करने का महत्वपूर्ण कार्य वित्त प्रबंधक द्वारा किया जाता है। सामान्यतः वित्त प्रबंधक सर्व प्रथम स्थायी सम्पत्ती के क्रय हेतु प्राप्त पूंजी का विनियोग करता है तत्पश्चात चालू संपत्ती में विनियोग करता है।


7. रोकड प्रबंध का कार्य किसी भी व्यवसाय में विभिन्न मामलों पर विभिन्न बार रोकड से व्यवहार करना आवश्यक होता है।

सामन्यतः नकद विक्रय, कर्ज की वसुली, बँक से अल्पवधी कर्ज इत्यादी स्रोतों से उचित प्रमाण में रोकड उपलब्ध करने का महत्वपूर्ण कार्य वित्तीय प्रबंधक द्वारा किया जाता है। इसके सुचारू संचालन हेतु "रोकड प्रवाह विवरण निर्माण करने का कार्य वित्तीय प्रबंधक द्वारा किया जाता है।


8. वित्तीय नियंत्रण का अमल करना वित्तीय नियन्त्रण कौश्यलपूर्ण तरीके से अमल में लाने का कार्य वित्त प्रबंधक द्वारा किया जाता है। व्यावसायिक लक्ष्यो को प्राप्त करने के लिए वित्तीय नियंत्रण का अमल करना अत्यंत आवश्यक है।

वित्तीय नियंत्रण का अमल करने हेतु सम्बन्धी त पूर्वानुमानीत आकडों से वास्तविक आकड़ों की तुलना कर उचित दिशा में निर्णय लेने का कार्य वित्तीय प्रबंधक द्वारा किया जाता है।


9. लाभ का प्रबंधन कार्य लाभ का उचित उपयोग व्यवसाय के हित में करने का कार्य वित्तीय प्रबंधक द्वारा किया जाता है। लाभ के निधी का विभिन्न योजनाओं में पूर्नविनियोग करने से व्यवसाय का विस्तार होता है परंतु अंश धाराकों के हित पर आघात होता है। इसलिए लाभ की निती निश्चित करने का कार्य वित्तीय प्रबंधक द्वारा किया जाता है।

लाभाश की घोषणा एवं भविष्यकालिन लाभ प्रदकता से व्यवसायिक संगठन के अंशों की बाजार में किमत बढ़ती है। इसलिए वित्त प्रबंध उक्त दोनों बिन्दू पर गंभीरता से विचार कर लाभ के निधी का उचित प्रबंधन करने का कार्य करता है। 


10. दैनिक कार्य वित्तीय प्रबंधक को वित्त विभाग से संबंधित सभी व्यवहार का लेखा रखना, वित्तीय विवरणों को तैयार करना, उनका पर्यवेक्षण करने, वित्तीय प्रपत्रों एवं लेखा को सुरक्षित करने, इत्यादी कार्य करने आवश्यक है।


11. व्यावसायिक कार्य - वित्तीय प्रबंधक को संगठन के प्रवर्तन के वक्त वित्तीय योजना तैयार करने, वित्तीय संकट के समय वित्त पूनरू समायोजन करने, सममिलन के समय संगठन का मूल्यांकन करने, लाभाश निती पर सलाह देने, पेशन, कल्याण, तथा अशधारियों से संपर्क इत्यादी कार्य करना पड़ता है।