जेंडर और लिंग - gender and gender

जेंडर और लिंग - gender and gender


'जेंडर' सामाजिक-सांस्कृतिक शब्द हैं, जो सामाजिक परिभाषा से संबंधित करते हुए समाज में 'पुरुषों' और 'महिलाओं' के कार्यों और व्यवहारों को परिभाषित करता हैं, जबकि, 'सेक्स' शब्द 'आदमी' और 'औरत' को परिभाषित करता है जो एक जैविक और शारीरिक घटना है। अपने सामाजिक, ऐतिहासिक और सांस्कृतिक पहलुओं में जेंडर पुरुष और महिलाओं के बीच शक्ति से कार्य का संबंधहैं जहाँ पुरुष को महिला से श्रेष्ठ माना जाता हैं। इस तरह, 'जेंडर' को मानव निर्मित सिद्धांत समझना चाहिए, जबकि 'सेक्स' मानव की प्राकृतिक या जैविक विशेषता हैं।


जेंडर असमानता को सामान्य शब्दों में इस तरह परिभाषित किया जा सकता हैं कि, लैंगिक आधार पर महिलाओं के साथ भेदभाव । समाज में परंपरागत रूप से महिलाओं को कमजोर जाति-वर्ग के रूप में मान्यकता दी जाती है। वह पुरुषों की अधीनस्थ स्थिति में होती है। वो घर और समाज दोनों में 'जेंडर' को जेंडर ही लिखा जाना चाहिए ।

'लिंग' उसका अनुवाद नहीं है sex/सेक्स का अनुवाद ही ' लिंग' है । शोषित, अपमानित, अक्रमित और भेदभाव से पीड़ित होती हैं। महिलाओं के खिलाफ भेदभाव का ये अजीब प्रकार दुनिया में हर जगह प्रचलित है और भारतीय समाज में तो बहुत अधिक है। अब यदि सामाजिक संदर्भों में इसे देखने का प्रयास करें तो जेंडर का संबंधसामाजिक निर्मिति से जिस तरह भाषा में शब्दों के वर्गीकरण के लिए उनके सामाजिक व्यवहार को आधार बनाया गया और उन्हें स्त्रीलिंग, पुल्लिंग व नपुंसकलिंग के रूप में विभाजित किया गया उसी प्रकार सामाजिक संरचना में 'जेंडर' को सामाजिक प्रक्रिया के तहत स्त्री और पुरुष की निर्धारित भूमिकाओं में ढाला गया। स्त्री और पुरुष दोनों ही जैविक संरचना हैं यह सत्य है इन्हें बदला नहीं जा सकता। लेकिन इनकी पारिवारिक, सामाजिक, आर्थिक व राजनैतिक भूमिका का निर्धारण जब किया जाता है तो इनके अपने स्वतंत्र अस्तित्व पर प्रश्न अंकित हो जाता है, जिसका जवाब जेंडर देता है। यह केवल लिंगों के बीच के अंतर को नहीं बताता वरन सामाजिक, राजनैतिक व आर्थिक स्तर पर सत्ता से इसके संबंध को भी परिभाषित करता है, सत्ता से लिंग व जेंडर का संबंध केवल आज के संदर्भों को ही नहीं बताता बल्कि इतिहास में स्त्री की भूमिका से उसे जोड़कर देखता है।