जेंडर रूढ़ियाँ - gender stereotypes
जेंडर रूढ़ियाँ - gender stereotypes
रूढ़िवाद एक ऐसी अवधारणा है जिसके द्वारा हम अपने आस-पास के समाज को कुछ पूर्व प्रचलित और समान्यीकृत मान्यताओं के आधार पर समझने का प्रयास करते है। व्यक्ति अपने अनुभवों के आधार पर तो कभी अपने आस-पास उपस्थित कुछ महत्वपूर्ण तथ्यों व परिस्थितियों के द्वारा रूढ़िवाद का निर्माण करता है रूढ़िवाद प्रायः परंपरा पर आधारित होता है एवं समाज में आ रहे आधुनिक बदलावों में अवरोध उत्पन्न करता है। यह सकारात्मक एवं नकारात्मक दोनों रूपों में पाया जाता है परंतु सामान्यतः इसका नकारात्महक रूप ही प्रचलित है।
पुरुषों के बारे में पारम्परिक धारणा है कि पुरुष सक्रिय है फुर्तीला है और उसकी सोच स्पष्ट है। इन्हें पुरुषों के प्राकृतिक गुणों के रूप में देखा जाता है, जो सकारात्मकता का प्रतीक माने जाते हैं
जबकि पारम्परिक सोच के अनुसार महिलाओं को निष्क्रिय, सुस्त, और अस्पष्ट या रहस्यात्मक विचारों वाली माना जाता है। ये गुण प्राकृतिक रूप से नकारात्मकता का प्रतीक माने जाते हैं। यह परंपरागत सोच उनके जैविक अंतर के कारण उपजी है जिसके अनुसार पुरुष सक्रिय प्रदाता है और महिला निष्क्रिय धारक है। यह परंपरावादी लोगों की सोच है।
जेंडर सामाजिक रचना है जो कि समाज में महिला एवं पुरुषों के मध्य अंतर स्थापित करने के उपयोग में आते है। इसकी उत्पत्ति महिला एवं पुरुषों की भूमिका निर्धारण, व्यवहार, क्रियाकलापों आदि के कारण हुई है। जिसके परिणाम स्वरूप व्यक्तियों के मन में महिला एवं पुरुषों के विषय में कुछ सोच एवं अभिवृत्ति उत्पन्न होती है जिसे हम जेंडर रूढ़िवाद कहते हैं ।
Gender stereotype is referred to the "belief and attitudes towards masculine and fem in ine traits." it may also be called as "Sexual d IV is ion of Labour."
वार्तालाप में शामिल हों