गेस्टाल्ट का अन्तर्दृष्टिसिद्धान्त - Gestalt Theory of Insight

गेस्टाल्ट का अन्तर्दृष्टिसिद्धान्त - Gestalt Theory of Insight


अन्तर्दृष्टि या सूझ के सिद्धान्त के प्रमुख समर्थक गेस्टाल्टवादी हैं। उनके मतानुसार व्यक्ति या प्राणी सूझinsight) द्वारा सीखते हैं। सबसे पहले प्राणी अपने आस-पास की परिस्थिति के विभिन्न अंगो से पारस्परिक सम्बन्धों की स्थापना करता है और सम्पूर्ण परिस्थिति को समझने का प्रयास करता है, तत्पश्चात् उसके अनुसार अपनी प्रतिक्रिया करता है। अन्य शब्दों में सूझ द्वारा सीखने का तात्पर्य परिस्थिति को पूर्णतया समझकर सीखना है। यह अकस्मात् होती है तथा परिस्थिति का प्रत्यक्षीकरण नये ढंग से होता है। जैसे किसी फूल को पूर्ण रूप में देखकर तथा समझकर ही बाद में उसके भागों का अध्ययन करना अधिक सुगम होता है।


गेस्टालटवादी अधिगम सीखने को केवल प्रयास करते हुए भूल सुधारने अथवा किसी उद्दीपन के प्रति सहज स्वभाविक अनुकिया व्यक्त करने जैसा कार्य नहीं मानते। वे उसे एक उद्देश्यपूर्ण अन्वेषणात्मक और रचनात्मक प्रक्रिया मानकर चलते है। उनके अनुसार सीखने वाला जो कुछ कर रहा होता है। उसका समय रूप में प्रत्यक्षीकरण करता है तथा उसमें निहित संयोगो अथवा संयोजनों का ठीक प्रकार विश्लेषण करता है। इस प्रत्यक्षीकरण और विश्लेषण के पश्चात वह बहुत ही समझदारी से कोई अनुक्रिया करता है। गेस्टबादी इसी प्रक्रिया के लिए अन्तः दृष्टि का प्रयोग करते हैं।


कोहलर का प्रयोगः


सूझ द्वारा सीखने के सिद्धान्त का प्रतिपादन करने के लिये कोहलर (Kohler) ने एक भूखे चिपांजी को पिंजड़े मैं बस्ददिया। पिंजड़े में दो सन्दूक (बॉक्स) रख दिये।

पिंजड़े की छत पर कुछ कैलो को इतनी ऊँचाई पर टांग दिया कि उन्हें दोनों बाक्स की एक के ऊपर दूसरे को रखकर ही प्राप्त किया जा सकता था। चिंपांजी ने केले प्राप्त करने के लिये अनेक प्रयत्न किये। उसने केले प्राप्त करने के लिये पहले एक बक्से को उठाकर रखा और उस पर चढ़कर केले प्राप्त करने में असफल होने पर दूसरे बक्से को उठाकर पहले वाले बक्से के ऊपर रखा। इस प्रकार दोनों बक्सों को एक के ऊपर एक रखने से बक्से की ऊंचाई इतनी हो गई कि चिपाजी ऊपर चढ़कर केले प्राप्त करने में सफल हो गया।


चिपाजी के समान मनुष्य भी सूझ के आधार पर सीखते हो प्रत्येक कार्य या क्रिया के सौखने में हमें सूझ का प्रयोग करना पड़ता है। विभिन्न समस्याओं का हल भी सूझ के माध्यम से होता है। प्रायः यह देखा गया है कि किसी ऊँचे स्थान पर रखी मिठाई को बालक चिंपाजी द्वारा अपनाई गई विधि द्वारा प्राप्त करते हैं। काफ्का महोदय के अनुसार मुझमें व्यक्ति चिन्तन तर्क तथा कल्पनाशक्ति से काम लेता है। जिस व्यक्ति में जितनी कल्पनाशक्ति होगी उतनी ही उसमें सूझ होगी।