श्री अरविन्द की शिक्षा की देन - The gift of Sri Aurobindo's education

श्री अरविन्द की शिक्षा की देन - The gift of Sri Aurobindo's education


शिक्षा के क्षेत्र में अरविन्द ने अपने बहुमूल्य विचारों का ही नहीं वरन व्यावहारिक योगदान भी दिया है। शिक्षा के क्षेत्र में सबसे महत्वपूर्ण योगदान उनके शैक्षणिक विचारों का साकार रूप अरबिन्द आश्रम को समझा जा सकता है।


अरविन्द आश्रम


1910 ई. में अरविन्द ने फ्रेंच उपनिवेश पाण्डुचेरी में इस आश्रम की स्थापना की। इस आश्रम का उद्देश्य कोई सुनियोजित शिक्षा प्रदान करना नहीं वरन अध्ययन, चिंतन और मनन के द्वारा संसार के कल्याण के लिए कार्यक्रम निर्धारित करना था।


1920 ई. में एक फ्रांसीसी महिला मीरा रिचर्ड (दि मदर) वहाँ आकर रहने लगी। उसी समय से आश्रम में रहने वालों की संख्या बढ़ती गयी।

इस आश्रम में संसार के कोने-कोने से आकर लोग आध्यात्मिक ज्ञान प्राप्त करते थे। इस आश्रम में जाति, धर्म, लिंग सम्प्रदाय, राष्ट्रीयता आदि का भेदभाव नहीं था।


अरविन्द ने आश्रमवासियों के बच्चों के लिए 1943 ई. में एक स्कूल की स्थापना की। इसमें आज विभिन्न देशों, धर्म, और जातियों के 300 से अधिक बच्चे शिक्षा प्राप्त कर रहे हैं। इन्होंनेस्कूल को दो भागों में बांटा जूनियर औरमाध्यमिक | आश्रम के शिक्षक आश्रमवासी साधक हैं। इन्हें किसी भी प्रकार का वेतन नहीं दिया जाता है, बल्कि उनके परिवार की सभी आवश्यकताओं को आश्रम द्वारा पूरा किया जाता है।


1952 ई. में अरविन्द अंतर्राष्ट्रीय विश्वविद्यालय केन्द्र की स्थापना की गयी, अरविन्द विश्वविद्यालय केन्द्र में शिशु की शिक्षा से लेकर अनुसंधान कार्य तक की व्यवस्था है। वर्तमान समय में लगभग 15 देशों के छात्र यहाँ पर शिक्षा प्राप्त कर रहे हैं। आश्रम में स्वयं का प्रेस है। प्रेस के लिए कागज भी यहीं पर बनाया जाता है। इस तरह से आश्रम आत्मनिर्भर है। इस आश्रम की शिक्षा निःशुल्क है।