गोर्डन का लाभांश मॉडल - Gordon's Dividend Model

गोर्डन का लाभांश मॉडल - Gordon's Dividend Model


एम. गोर्डन ने अपना लाभांश मॉडल वाल्टर की तरह ही प्रतिपादित किया है इसे लाभांश विकास मूल्यांकन मॉडल के नाम से भी जाना जाता है क्योंकि इस मॉडल में आय के प्रतिधारण तथा लाभांश के विकास में संबंध स्थापित किया गया है। इनका विचार है कि अंश का मूल्य, अंश को भविष्य में प्राप्त लाभांश के मूल्य को प्रतिबिंबित करता है। अतः लाभांश का भुगतान तथा उसका विकास अंशों के मूल्य में प्रासंगिक है। यह मॉडल मानता है कि अंश का बाजार मूल्य, अंश के अपलेखित भावी लाभांश के भुगतान के योग के बराबर होता है।

वास्तव में गोर्डन का मॉडल व्यावहारिक न होकर सैद्धांतिक अधिक है जिसके अनुसार समता अंशों का मूल्यांकन किया जाता है।


गोर्डन के विचार में विनियोक्ता विवेकपूर्ण ढंग से विचार करता है और वर्तमान लाभांश को भावी लाभांश की अपेक्षाकृत अधिक महत्व देता है। वह जोखिम से भी बचना चाहता है। उस फर्म के अंशों का मूल्य कम होगा जो आय के अधिक भाग को प्रतिधारित करती है। इस प्रकार, यदि कम दर से लाभांश वितरित किया जाता है तो अंशों का बाजार मूल्य कम होगा और फलस्वरूप फर्म का मूल्य भी कम होगा।