ग्रीन हाऊस प्रभाव , ग्रीन हाउस गैसों में वृद्धि का प्रभाव - Green house effect, effect of increase in greenhouse gases
ग्रीन हाऊस प्रभाव , ग्रीन हाउस गैसों में वृद्धि का प्रभाव - Green house effect, effect of increase in greenhouse gases
वायुमण्डल में कुछ ऊष्मारोधी गैसों जैसे-कार्बनडाइ ऑक्साइड, जलवाष्प, मेथेन तथा नाइट्रस ऑक्साइड आदि की मात्रा बढ़ जाने के कारण पृथ्वी के औसत ताप में वृद्धि को ग्रीन हाउस प्रभाव कहते हैं। ग्रीन हाउस वास्तुव में काँच से बने छोटे पौधा घरों को कहते हैं जहाँ शीत से बचाने हेतु पौधे उगाये जाते है। सूर्य के प्रकाश में ग्रीन हाउस प्रकाश को अन्दर आने देते है तथा ऊष्मा को बाहर जाने से रोकते है जिससे पूरा ग्रीन हाउस गर्म हो जाता है तथा पौधे शीत से प्रभावित नहीं होते हैं। इसी प्रकार विभिन्न गैसों की अधिकता के कारण पृथ्वी द्वारा के प्रकाश से अवशोषित ऊष्मा का जब विकिरण होता है तो वह वायुमण्डल में ही रह जाती है जिससे पृथ्वी का तापमान बढ़ जाता है। इन गैसों के अणु ऊष्मा रोकने हेतु एक सतह का निर्माण कर लेते हैं। इन ऊष्मारोधी गैसों जैसे (कार्बनडाइ ऑक्साइड, जलवाष्प, मेथेन तथा नाइट्रस ऑक्साइड आदि) को ग्रीन हाउस गैसें कहा जाता है।
ग्रीन हाउस गैसों में वृद्धि का प्रभाव
1. वैश्विक तपन
2. जलवायु में परिवर्तन
3. समुद्रजल स्तसर में वृद्धि
4. जन्तुर तथा वनस्पतियों पर प्रभाव
5. ओजोन परत का ह्रास
6. अतिवृष्टि व अनावृष्टि की समस्या
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