समूह साथी मूल्यांकन-समाजमिति - Group Partner Evaluation-Sociometry

समूह साथी मूल्यांकन-समाजमिति - Group Partner Evaluation-Sociometry


समाजमिति सामाजिक मनोविज्ञान की देन है तथा इसके द्वारा एक समूह के सदस्यों में पारस्परिक संबंध का पता लगाया जाता है। मनुष्य एक सामाजिक प्राणी होने के नाते समाज के अन्य व्यक्तियों से संबंध विच्छेद नहीं कर सकता। सामाजिक वातावरण में समायोजन स्थापित करने के लिए उसे अन्य व्यक्तियों के साथ मधुर संबंध बनाने ही पड़ते हैं। समाजमिति में सामाजिक रचना का अध्ययन करने के लिए सोशियोग्राम (Sociogram) प्रयोग में लाया जाता है। इसके द्वारा तटस्थ, नायक, गुटबंदी एवं तिरस्कृत लोगों के बारे में जानकारी प्राप्त की जाती है। इस विधि का विकास 1934 में मुरेनो (Moreno) ने किया। इस विधि में किसी समूह के सदस्यों से किसी गुण विशेष की दृष्टि से अपने लीडर या साथियों का चयन करने को कहा जाता है। यह आवश्यक नहीं कि एक ही व्यक्ति को सभी व्यक्ति चाहते हों। किसी एक परिस्थिति में जिस व्यक्ति को पसंद किया जाता है, किसी अन्य परिस्थिति में सभी व्यक्ति उसे नापसंद कर सकते हैं। व्यक्ति जिस समाज में रहता है या जिस समूह में रहता है, वहाँ उसके संबंध स्थापित हो जाने स्वाभाविक ही है।

लेकिन हम सभी सम्पर्क में आने वाले व्यक्तियों को खुश रख सकें, यह सम्भव नहीं होता। दूसरे, सामाजिक परिस्थितियाँ इतनी जटिल हैं कि एक परिस्थिति में आप दूसरे को अपना बना लेते है, तो दूसरी परिस्थिति में उसे नाराज भी कर सकते हैं। उदाहरणार्थ, सांस्कृतिक कार्यक्रमों में सफल विद्यार्थी क्रिकेट में भी उतना ही सफल हो, आवश्यक नहीं। सोशियोग्राम विधि का प्रयोग नेता का चयन, लोकप्रिय एवं कम लोक प्रिय व्यक्ति का चयन अथवा अपेक्षित बालक आदि का पता लगाने में किया जाता है। एण्डू तथा विलि के अनुसार- "समाजिमिति एक रेखाचित्र है, जिसमें कुछ चिन्ह और अंक किसी सामाजिक समूह के सदस्यों द्वारा सामाजिक स्वीकृति या त्याग का ढंग प्रदर्शित करने के लिए प्रयुक्त होते हैं।" सोशियोग्राम की रचना करते समय हम कुछ निर्देश दे देते हैं। उदाहरणार्थ- "स्काउट कैम्प में हमें टोलियों का चयन करना है। टोली चयन में आप उन विद्यार्थियों के नाम लिखिए, जिनको आप अपनी टोली में सम्मिलित करना चाहेंगे। आप किसी ऐसे विद्यार्थी का नाम भी लिख सकते हैं, चाहे वह उस समय उपस्थित हो या नहीं।" इस आधार पर आँकड़े एकत्रित करने के बाद प्रत्येक विद्यार्थी का क्रमांकन या कोई विशेष चिंहीकरण करते हैं। फिर, इन सबके आधार पर सोशियोग्राम बनाया जाता है। सबसे अधिक लोकप्रिय बालक केंद्र में जाता है तथा परित्यक्त बालक इधर-उधर जाते हैं।