विकास, वृद्धि और परिपक्वता - Growth, Growth and Maturity
विकास, वृद्धि और परिपक्वता - Growth, Growth and Maturity
१. मानव विकास अनेक कारकों द्वारा प्रभावित होता है।
२. इन कारकों को मूलतः दो वर्गों में विभाजित किया गया है आनुवंशिक एवं पर्यावरणीय।
३. आनुवांशिक कारकों से तात्पर्य ऐसे गुणों से है जो माता-पिता से संतान में आते है, अर्थात जो जन्म के पहले गर्भधारण के समय से ही व्यक्ति में मौजूद होते हैं।
४. परिवेशीय कारकों से तात्पर्य ऐसे कारकों से है जो व्यक्ति के जीवनकाल में मौजूद होते है और उसके विकास की दिशा एवं दशा को प्रभावित करते हैं। इसके अंतर्गत सामाजिक, शैक्षिक और पारिवारिक कारक आते हैं।
५. विकास एक सतत और क्रमिक प्रक्रिया है अर्थात् उसमें व्यक्ति का विकास जन्म से मृत्यु तक चलता रहता है और इस दौरान उसमें क्रमानुसार परिवर्तन होते रहते हैं
६. शिक्षण के क्षेत्र में सफलता पाने के लिए हर अध्यापक छात्र के सर्वागीण विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। इसलिए हर अध्यापक अगर बुद्धि और विकास के अर्थ, अवस्थाएँ एवं सिद्धांतों के बारे में समझ ले तो वह विद्यार्थियों का समग्र विकास कर सकता है।
प्रायः बृद्धि तथा बिकास को समानार्थक रुप में प्रयोग किया जाता है। निःसन्देह ये दोनों ही शब्द आगे बढ़ने की ओर संकेत करते हैं परन्तु मनोवैज्ञानिक दृष्टि से इन दोनों संप्रत्ययों में अंतर है।
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