पूँजीकरण का महत्व एवं अनिवार्यता - Importance and necessity of capitalization
पूँजीकरण का महत्व एवं अनिवार्यता - Importance and necessity of capitalization
किसी भी व्यावसाय / कपनी को पूजीकरण की आवश्यकता निम्न स्थिती में होती है।
1) कंपनी की स्थापना करते समय:- सामान्यतः नई कंपनी / व्यवसाय स्थापन करते समय कंपनी में पूँजीकरण की प्रक्रिया कार्यान्वित की जाती है। कंपनी / व्यवसाय के कार्य स्वरूप एवं प्रकृति के अनुसार पूजी की आवश्यकता सुनिश्चित करके कंपनी के स्थापना करते समय पूजीकरण किया जाता है।
2) व्यवसाय / कंपनी का विस्तार करते समय:- चालू व्यवसाय / कंपनी को बढ़ाने एवं विस्तार करते समय व्यवसाय / कपनी में अधिक मात्रा पूजी की आवश्यकता होती है। इसलिए चालू कपनी में विस्तार की रूपरेखा, नियोजन के अनुसार कंपनी के विस्तार के समय पूजीकरण की प्रक्रिया कंपनी में की जाती है।
3) कंपनी के एकत्रीकरण एवं संविलयन की स्थिती :- दो कंपनीयों का एकत्रीकरण करते. वक्त पूंजी की पूर्नरचना की जाती है। पूंजी की पूर्नरचना के अनुसार एकत्रीत कंपनी का एवं सविलपन किए गई कंपनी का एकत्रीत पूजीकरण, पूर्नरचना के अनुसार करना आवश्यक होता है।
4 ) कंपनी का पूर्नसंघटना करते समय:- पूराने कंपनी का पूर्नसंघटन करके, व्यवसाय के स्वरूप एवं प्रकृति में आंशिक बदल करने का प्रयास किया जाता है। ऐसे स्थिती में कंपनी के पूराने पूजी सरचना का विशेष उपयोग नहीं होता। इसलिए कंपनी का पूर्नसंघटन करते समय पूजीकरण की प्रक्रिया पूर्नसंघटीत कंपनी को आवश्यक पूंजी के अनुसार की जाती हैं।
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