पूंजीकरण का महत्व - importance of capitalization

पूंजीकरण का महत्व - importance of capitalization


पूंजीकरण की आवश्यकता में देखे गए / पढ़े गए बिन्दूओं को देखते हुए यह कहा जा सकता है कि, किसी कंपनी के स्थापना करते समय जिस तरह पूजीकरण की आवश्यकता होती है, उसी तरह कंपनी / व्यवसाय के जिवनकाल में विभिन्न प्रसगों में स्थितीयों में पूंजीकरण किया जाता है। इन्ही कारणों से कंपनी के लिए पूंजीकरण यह एक महत्वपूर्ण प्रक्रिया है। पूजीकरण यह वित्तीय नियोजन का महत्वपूर्ण अंग है। पूंजीकरण का आशय एवं अर्थ यह है कि, किसी भी व्यवसाय / कंपनी में निवेष किए गए कुल पूजी की राशी है। इस में कंपनी के अंशों की बिक्री करके तथा कर्ज रोखे एवं अन्य प्रतिभूतीयों का निर्गमन कर प्राप्त किए गए पूंजी का समावेश होता है। पूंजीकरण में व्यवसाय / कंपनी को आवश्यक पड़ने वाले वित्तीय मांग का समावेश होता है। इसमें व्यवसाय / कंपनी के आवश्यक माग के अनुसार वित्तीय राशी की गणना की जाती है तथा वित्तीय माग का क्षेत्र भी स्पष्ट किया जाता है। विभिन्न प्रतिभूतीयों से संकलित किए जाने वाली वित्तीय राशी का अनुपात पूजीकरण सुनिश्चित किया जाता है। इसलिए व्यवसाय / कंपनी के लिए पूजीकरण एक समग्र सकल्पना है, जिसके माध्यम से व्यवसाय / कंपनी के वित्तीय माग की आपूर्ती की जाती है।