विनियोग हेतु निर्णयन का महत्व - Importance of Decision Making for Appropriation
विनियोग हेतु निर्णयन का महत्व - Importance of Decision Making for Appropriation
स्थायी संपत्तियों में विनियोग संबंधी निर्णयन का महत्व इसलिए ही नहीं होता है कि पूँजीगत परियोजनाओं में अधिक धन दीर्घकाल के लिए विनियोग होता है, इन निर्णयों का व्यवसाय के भावी अर्जनों पर सीधा प्रभाव पड़ता है। निम्नलिखित कारणों से विनियोग निर्णयों का महत्व निरंतर बढ़ता जा रहा है-
(क) स्थायी संपत्तियों का विस्तार भावी विक्रय के आकार को ध्यान में रखकर किया जाता है। अतः स्थायी संपत्तियों में विनियोग संबंधी निर्णय भावी विक्रय की मात्रा को पूरा करने के लिए उत्पादन में होने वाली वृद्धि को ध्यान में रखते हुए किया जाता है जिससे कंपनी की लाभार्जन क्षमता में वृद्धि होती है।
(ख) विनियोग निर्णयन, कंपनी के दीर्घकानीन नियोजन एवं नीति निर्धारण में सहायता प्रदान करते हैं।
(ग) विनियोग निर्णयन के आधार पर एक कंपनी बाजार में स्थायी संपत्तियों की माँग एवं पूर्ति की समीक्षा करते हुए अपने लिए अपेक्षित संपत्तियों के क्रम का उचित समय निर्धारित कर सकती है।
(घ) विनियोग निर्णयन के माध्यम से प्रबंध स्थायी संपत्तियों में किए जाने वाले व्ययों की व्यवस्था पहले से ही करत लेती है। परिणामस्वरूप इस काम में वित्तीय संकट सामने नहीं आता है।
(च) विनियोग निर्णयन संपत्तियों की पुनर्स्थापना की सुदृढ़ नीति निर्धारित करने में सहायता प्रदान करता है।
(छ) लागतों को घटाने की विभिन्न तकनीकों का अध्ययन करने के पश्चात् ही विनियोग निर्णयन किया जाता है। अतः विनियोग निर्णयन लागतों में कमी लाने में सहायक होते हैं। विनियोग निर्णयन क्षेप्य बीमा और अन्य स्थायी व्ययों पर पूँजीगत लागत के पड़ने वाले प्रभाव की जाँच करने के पश्चात किए जाते है, जिसके कारण कंपनी की लागतों में कमी लाना संभव होता है।
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