शैक्षिक, व्यावसायिक तथा व्यक्तिगत निर्देशन की आवश्यकता - Importance of Educational Vocational & Personal Guidance

शैक्षिक, व्यावसायिक तथा व्यक्तिगत निर्देशन की आवश्यकता - Importance of Educational Vocational & Personal Guidance


1 शैक्षिक निर्देशन :- निर्देशन के विभिन्न प्रकारों में से सबसे महत्वपूर्ण प्रकार शैक्षिक निर्देशन है। शैक्षिक निर्देशन का सीधा सम्बन्ध विद्यार्थी से होता है । शैक्षिक निर्देशन का मुख्य लक्ष्य विद्यार्थियों में स्कूली वातावरण के साथ समायोजन स्थापित करने की योग्यता का विकास करना तथा विद्यार्थियों में आवश्यक जागरूकता एवं संवेदनशीलता पैदा करना ताकि वे उचित अधिगम लक्ष्यों, उपकरणों, परिस्थितियों आदि का स्वयं चयन कर सकें। बालक विद्यालय वातावरण में समायोजन स्थापित कर सके इसीलिए शिक्षा में निर्देशन को अभिन्न अंग माना गया है क्योंकि शैक्षिक निर्देशन को बालक की वृद्धि के सन्दर्भ में देखा जाता है।


जोन्स के अनुसार, "शैक्षिक निर्देशन का सम्बन्ध विद्यार्थियों को प्रदान की जाने वाली उस सहायता से है जो उन्हें विद्यालयों, पाठ्यक्रम चुनावों एवं विद्यालयी जीवन से सम्बद्ध समायोजनों के लिए अपेक्षित है। "


शैक्षिक निर्देशन के चार प्रमुख कार्य हैं


1. विद्यार्थी की क्षमता, रूचि एवं साधनों के अनुसार शैक्षिक योजना का निर्माण करना ।


2. विद्यार्थियों की भावी सम्भावनाओं के सम्बन्ध में जानकारी प्राप्त करना।


3. शैक्षिक कार्यक्रम में आवश्यक प्रगति के लिए सहायक होना।


4. विद्यार्थियों की आवश्यकताओं को पूरा करने के लिए। मायर्स ने भी शैक्षिक निर्देशन को विद्यार्थी के विकास या शिक्षा के लिए अनुकूल परिस्थितियाँ उत्पन्न करने की प्रक्रिया बताया है। इस दृष्टि से शैक्षिक निर्देशन विद्यार्थी की शिक्षा के दौरान हर स्तर पर होना चाहिए।


2 व्यावसायिक निर्देशन :- व्यावसायिक निर्देशन मात्र एक तकनीकी प्रक्रिया ही नहीं जिससे किसी व्यक्ति को किसी व्यवसाय में 'फिट' कर दिया जाये और न ही व्यक्ति किसी व्यवसाय के लिए ही "पैदा" हुआ है । सामान्य बुद्धि वाले को विभिन्न व्यवसायों में समायोजित किया जा सकता है । व्यावसायिक निर्देशन के अन्तर्गत व्यक्ति में निहित क्षमताओं, योग्यताओं तथा व्यावसायिक क्षेत्रों में परिवर्तित परिस्थितियों एवं आवश्यकताओं का मूल्यांकन किया जाता है। व्यावसायिक निर्देशन में व्यवसाय के चयन से सम्बन्धित विभिन्न समस्याओं के समाधान के लिए प्रदान की जाने वाली वह सहायता शामिल है जो व्यावसायिक अवसरों के लिए अपेक्षित योग्यताओं को ध्यान में रखकर प्रदान की जाती है।


सुपर के अनुसार, "व्यावसायिक निर्देशन का मुख्य उद्देश्य व्यक्ति को इस योग्य बनाना है कि वह अपने • व्यवसाय से सामंजस्य स्थापित कर सके, अपनी शक्तियों का प्रभावशाली तरीके से उपयोग कर सके तथा उपलब्ध सुविधाओं द्वारा समाज का आर्थिक विकास कर सके।"


क्रो एवं क्रो ने भी व्यावसायिक निर्देशन के उद्देश्य बताए हैं। इन उद्देश्यों को ध्यान में रखकर ही व्यावसायिक निर्देशन की प्रक्रिया का संचालन किया जाता है। व्यावसायिक निर्देशन की प्रक्रिया में व्यवसाय चार्ट, व्यवसाय विवरण पत्रिका, वार्ताओं आदि के माध्यम से विद्यार्थी की व्यवसाय से सम्बन्धित जानकारी प्राप्त की जाती है।


संक्षेप में हम कह सकते हैं कि व्यावसायिक निर्देशन व्यक्तियों को विभिन्न व्यवसायों में समायोजित होने में सहायता करता है। इसीलिए व्यावसायिक निर्देशन की आवश्यकता रहती है। इस प्रकार व्यावसायिक निर्देशन-


1. एक प्रक्रिया है।


2. व्यवसाय चयन तथा व्यवसाय-समायोजन के लिए आवश्यक है।


3. विभिन्न व्यवसायों के लिए आवश्यक गुणों तथा योग्यताओं के बारे में जानना।


4. विभिन्न व्यवसायों से परिचित कराने की प्रक्रिया ।


3 व्यक्तिगत निर्देशन :- व्यक्तिगत निर्देशन में व्यक्तिगत मनोवैज्ञानिक या संवेगात्मक सम्बन्ध जो कि व्यक्ति स्वयं से विकसित कर लेता है, शामिल किया जाता है। पैटरसन ने व्यक्तिगत निर्देशन में सामाजिक, मनोवेगात्मक तथा अवकाश सम्बन्धी समस्याएँ, मनोवेगात्मक समायोजन सामाजिक समायोजन तथा अवकाश एवं मनोरंजन की समस्याओं के समाधान के लिए शामिल किया जाता है। जीवन के चरित्र सम्बन्धी तथा आध्यात्मिक पक्ष को भी व्यक्तिगत निर्देशन में शामिल किया जा सकता है।


इस प्रकार, व्यक्तिगत निर्देशन का मुख्य उद्देश्य व्यक्ति के मानसिक, सामाजिक एवं भौतिक पक्षों में सामंजस्य पैदा करना है। क्योंकि ऐसा देखा गया है

कि कई बार व्यक्ति उच्च स्तर की शैक्षिक योग्यता तथा व्यावसायिक क्षेत्र में संतोषजनक प्रगति के बावजूद भी अनेक प्रकार के सामान्य व्यवहारों तथा सामाजिक अवगुणों से घिरे रहते हैं। ऐसे व्यक्ति अपने परिवार, पड़ोस तथा समुदाय के अन्य सदस्यों के बीच उपेक्षापूर्ण जीवन व्यतीत करता है परिणाम स्वरूप व्यक्ति प्रगतिशील शांतिपूर्ण जीवन की कल्पना नहीं कर सकता। ऐसी परिस्थितियों में व्यक्तिगत निर्देशन अति आवश्यक हो जाता है।


अतः व्यक्तिगत निर्देशन में निम्न प्रकार की समस्याओं का समाधान सम्भव है -


1. स्वास्थ्य एवं शारीरिक विकास सम्बन्धी समस्यायें


2. संवेगात्मक व्यवहार से सम्बन्धी समस्यायें


3. पारिवारिक जीवन एवं पारिवारिक सम्बन्धों से जुड़ी समस्यायें ।


4. धर्म, चरित्र, आदर्श एवं मूल्यों से सबंधित समस्याएँ


5. यौन, प्रेम एवं विवाह सम्बन्धी समस्याएँ शैक्षिक, व्यावसायिक तथा व्यक्तिगत निर्देशन को निम्न रेखाचित्र के माध्यम से और अधिक स्पष्ट प्रकार से समझा जा सकता है।