कार्यशील पूंजी के प्रबन्धन की महत्ता - Importance of managing working capital
कार्यशील पूंजी के प्रबन्धन की महत्ता - Importance of managing working capital
कार्यशील पूंजी के प्रबन्ध की व्याख्या से स्पष्ट हो रहा है कि कार्यशील पूंजी का कुप्रबन्ध अथवा कार्यशील पूंजी की अपर्याप्तता व्यवसाय की असफलता का प्रमुख कारण बन सकता है। यह कभी नहीं भूलना चाहिए कि कार्यशील पूंजी का प्रबन्ध वित्तीय प्रबन्ध का एक अभिन्न अंग होता है और अन्नतः समूचे निगम प्रबन्ध का भी । यह कार्यशील पूंजी का प्रबन्धन एक बहुत बड़ी चुनौती खड़ा करता है और एक वित्तीय प्रबन्धक के लिए ( जो संगठन में एक अहम भूमिका अदा करने के लिए तैयार हो ) यह चुनौती स्वागतयोग्र सुअवसर प्रदान करती है जिसका सही दिशा में उपयोग करके वित्तीय कुशीलता व क्षमता को बढ़ाया जा सकता है। कार्यशील पूंजी के प्रबन्ध के प्रति किसी भी प्रकार की उदासीनता या उसको नजर अंदाज करना तकनीकी दिवालियेपन की स्थिति को पैदा कर सकता है और कभी-कभी व्यावसायिक इकाई का विघटन भी हो सकता है। कार्यशील पूंजी के प्रबन्ध की अक्षमता व अकुशलता के फलस्वरूप या तो कार्यशील पूंजी की अपर्याप्तता हो सकती हैं या कार्यशील पूंजी की अधिकता और दोनों ही स्थिति खतरनाक होती है।
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