निर्देशन में परीक्षणों एवं उपकरणों की भूमिका - Importance of Tests & Tools in Guidance

निर्देशन में परीक्षणों एवं उपकरणों की भूमिका - Importance of Tests & Tools in Guidance


निर्देशन के कार्य को वैज्ञानिक, वस्तुनिष्ठ एवं प्रभावी बनाने के लिए व्यक्ति के बारे में आवश्यक तथ्य एकत्रित करने पड़ते हैं। यही संकलित आधार सामग्री शैक्षिक, व्यावसायिक, व्यक्तिगत तथा अन्य प्रकार के निर्देशन में प्रयुक्त होती है क्योंकि निर्देशन का उद्देश्य व्यक्ति को सहायता पहुँचाना है। अतः निर्देशन कार्यकर्ता का पहला काम है, उसे जानना सही तथा पूरी जानकारी होने पर ही प्रभावशाली निर्देशन दिया जा सकता है।


प्रभावशाली निर्देशन देने के लिए व्यक्ति से सम्बन्धित सही तथा पूरी जानकारी प्राप्त करने के लिए निर्देशन कर्ता विभिन्न प्रकार के परीक्षणों एवं उपकरणों की सहायता लेता है। निर्देशन की प्रक्रिया में प्रयुक्त महत्वपूर्ण परीक्षणों एवं उपकरणों की व्याख्या एवं उनकी भूमिका को निम्न प्रकार समझा जा सकता है।


1 बुध्दि परीक्षण बुध्दि एक अत्यन्त जटिल मानसिक प्रक्रिया है यद्यपि बुध्दि वास्तव में क्या है -


इस पर विद्वान एक मत नहीं है किर भी इसे ऐसी मानसिक योग्यता मान सकते हैं


(i) बुध्दि नई परिस्थितियों के साथ समायोजन करती है। 


(ii) सम्बन्ध तथा सहसम्बन्ध स्थापित करती है।


(iii) उच्च विचारों को जन्म देती है।


(iv) पूर्वानुभवों से ज्ञानार्जन करती है।


निर्देशन प्रदान करने से पूर्व हमें यह समझ लेना चाहिए कि बालकों की योग्यताओं में स्वाभाविक अन्तर होता है। इस अन्तर के कारण सभी बालक समान रूप से प्रगति नहीं कर पाते हैं।

ऐसी दशा में निर्देशनकर्ता के समक्ष एक जटिल समस्या उपस्थित हो जाती है। बुध्दि परीक्षा, बालकों में पाये जाने वाले अन्तर का ज्ञान प्रदान करके निर्देशनकर्ता को समस्या का समाधान करने में सहायता करती है जिससे निर्देशन को सही दिशा प्रदान की जा सके।


बुद्धि मापन हेतु विभिन्न प्रकार के परीक्षणों का प्रयोग किया जाता है। बुद्धि परीक्षणों में एक ही प्रकार के प्रश्न न होकर अनेक प्रकार के परीक्षण पदों का प्रयोग किया जाता है। व्यावहारिक दृष्टि से बुद्धि परीक्षणों की विषय वस्तु अथवा विषय सामग्री का सम्बन्ध उन मानसिक क्रियाओं से है जिनके द्वारा व्याक्ति जन्म जात विशेषताओं तथा पूर्व प्राप्त अनुभवों, दोनों की सहायता से नवीन परिस्थितियों अथवा समस्याओं के विभिन्न पक्षों को पूर्णत: समझ कर उन्हें अधिकाधिक सफलतापूर्वक हल करने का प्रयास करता है। बुद्धि मापन के लिए 1908 में सर्वप्रथम बिने (Binet) ने मानसिक आयु का विचार दिया तथा स्टर्न महोदय ने इसे स्वीकार करते हुए बुद्धि लब्धि ज्ञात करने हेतु एक सूत्र दिया - 


(क) व्यक्तिगत शब्दिक बुद्धि परीक्षण - इन परीक्षणों से तात्पर्य है कि एक समय पर एक ही व्यक्ति की बुद्धि का मापन किया जाना चाहिए। शाब्दिक बुद्धि परीक्षणों का प्रयोग पढ़े-लिखे लोगों पर ही प्रशासित किया जा सकता है।


उदाहरण - वैश्लर वैलेव्यू, बर्ट के तर्क शक्तिपरीक्षण, मिनेसोटा, जैसिल विकास अनुसूची आदि (ख) व्यक्तिगत अशाब्दिक बुद्धिपरीक्षण - यह परीक्षण अनपढ़ व्यक्तियों के लिए उपयोगी होते हैं। परीक्षणों में या तो ऐसे पद होते हैं जिनमें केवल पेंसिल की सहायता से चिन्ह लगाए जाते हैं या ऐसे पद होते हैं जिनमें कुछ सामग्री अथवा वस्तुओं का निर्देशानुसार प्रयोग करना होता है। उदाहरण - भूल-भूलैया परीक्षण, चित्र पूर्ति परीक्षण, असमानताएं पहचानना, वस्तु संयोजन, चित्र विन्यास, आकृति फलक, ब्लाक डिजायन, पास एलांग आदि।


(ग) सामूहिक शाब्दिक बुद्धि परीक्षण- इन परीक्षणों के द्वारा एक समय में ही अनेक व्यक्तियों पर प्रशासित कर बुद्धि परीक्षा ली जा सकती है। शाब्दिक सामूहिक बुद्धि परीक्षणों के उदाहरण निम्न है - उदाहरण - वर्गीकरण परीक्षण, सादृश्य उपपरीक्षण, सामान्य समझ परीक्षण सामान्य सूची सम्बन्धी परीक्षण, निष्कर्षात्मक परीक्षण आदि ।


(घ) सामूहिक अशाब्दिक बुद्धि परीक्षण- इन परीक्षणों द्वारा अधिकतर उन मानसिक प्रक्रियाओं की जाँच की जाती है जो शाब्दिक बुद्धि परीक्षणों द्वारा होती है। अंतर केवल इतना है कि सामूहिक शाब्दिक बुद्धि परीक्षणों में भाषा का ज्ञान जरूरी नहीं है। उदाहरण - शिकागो अशाब्दिक परीक्षण, पिगन अशाब्दिक परीक्षण, कैटिल का कल्चर फ्री टेस्ट " रैविन प्रोग्रेसिव मैट्रिसेज आदि।


II. रूप के आधार पर बुद्धि परीक्षण रूप के आधार पर बुद्धि परीक्षण दो प्रकार के होते हैं -


(क) शक्ति परीक्षण :- इन परीक्षणों द्वारा किसी व्याक्ति की एक विशेष क्षेत्र से सम्बबन्धित ज्ञान शक्ति की परीक्षा ली जाती है। इस प्रकार के परीक्षणों में प्रश्नों का कठिनाई स्तर धीरे धीरे बढ़ता चला जाता है । इस प्रकार प्रथम सर्वाधिक कठिन होता है। इन परीक्षणों में समय को अधिक महत्व नहीं दिया जाता।


(ख) गति परीक्षण : इन परीक्षणों में प्रश्नों का कठिनाई स्तर एक जैसा होता है किन्तु इसमें समय तत्व को अधिक महत्व दिया जाता है। परीक्षार्थी को एक निश्चित समय में ही प्रश्नों के उत्तर देने को कहा जाता है और प्रश्नों के सही उत्तरों के आधार पर बुद्धि का मापन होता है। इस प्रकार से परीक्षण मानसिक गति का मापन करते हैं।


II. मानसिक योग्यताओं के स्वरूप के आधार पर मानसिक योग्यताओं के स्वरूप के आधार पर


बुद्धि परीक्षण निम्नलिखित दो प्रकार के होते हैं-


(क) सामान्य बुद्धि परीक्षण : इस प्रकार के परीक्षणों का कार्य व्यक्ति की सामान्य बुद्धि का मापन करना होता है।


(ख) विशिष्ट बुद्धि परीक्षण: इस प्रकार के परीक्षणों में प्रश्न किसी विशिष्ट उद्देश्यों को ध्यान में रखकर सम्मिलित किए जाते हैं। इन परीक्षणों का कार्य व्यक्ति की विशिष्ट बुद्धि का मापन करना हैं होता है। 


2 उपलब्धि परीक्षण ( Achievement Test) उपलब्धि परीक्षण को निष्पत्ति परीक्षण, साफल्यक परीक्षण, ज्ञानोपार्जन परीक्षण आदि नामों से भी जाना जाता है। निर्देशन में विशेषतः शैक्षिक निर्देशक में उपलब्धि परीक्षण का विशेष महत्व है। निष्पत्ति परीक्षण में विषय सम्बन्धी अर्जित ज्ञान की परीक्षा है। इन परीक्षणों के द्वारा क्षेत्रों के ज्ञान का मापन करते हैं। इस प्रकार छात्रों की शैक्षिक उपलब्धि का उपलब्धि परीक्षणों द्वारा मापन करके छात्रों के सम्बन्ध में जो ज्ञान प्राप्त होता है, उस ज्ञान के आधार पर न केवल छात्रों का मार्गदर्शन किया जा सकता है बल्कि उन्हें परामर्श देकर उन्नति के शिखर की ओर पहुँचाने का प्रयास किया जा सकता है। निम्नलिखित रूप में वर्गीकृत किया जा सकता है ।