नैतिकता व शिक्षा में महत्वपूर्ण भूमिकाएं - Important roles in ethics and education
नैतिकता व शिक्षा में महत्वपूर्ण भूमिकाएं - Important roles in ethics and education
नैतिकता के प्रति उन्मुखीकरण में शिक्षक की महत्वपूर्ण भूमिका रहती है, जो वान्छित व्यवहार छात्र में अपेक्षित है वह यदि शिक्षक में ना हो तब शिक्षण प्रक्रिया अनुत्पादक हो जाती है। शिक्षक चाहे अपनी आदर्शवादी संकल्पना में एक कुम्हार के जैसे विद्यार्थी के व्याक्तित्व व जीवन को संवारता है अथवा क्रियावादी संकल्पना में अधिकगम प्रक्रिया के तहत छात्र की क्षमताओं को बाहर खींच कर लाता हो, हर रूप में अधिगम प्रक्रिया की एक धूरी शिक्षक ही है। अतः नैतिकता यदि व्यवहार में लानी है तब शिक्षक की भूमिका अहम हो जाती है।
विद्यालय का संगठन, उसका ध्येय वाक्य विद्यालय का सामाजिक उत्तरदायित्व, विद्यालय के प्रबंधन के नियम, कायदे इत्यादि का संस्था के सभी आयामों पर स्वीतः ही प्रभाव रहता हैं।
अतः विद्यालय के प्रबंधन, प्रशासन, नीति नियमों में सुदृढ़ता, कल्याण व नैतिकता का पुट रहे तो विद्यालय के सभी सहभागी चाहे वह अध्यापक हो या विद्यार्थी उसके सकारात्मक प्रभाव व उर्जा का लाभ लेते है। विद्यालय सामाजीकरण का महत्वपूर्ण संस्थान होने के कारण अपने नियम व प्रबंधन द्वारा नैतिकता की शिक्षा प्रत्यक्ष व परोक्ष दोनों रूप में प्रदान करते हैं।
शिक्षा में नैतिकता का स्थान केवल नैतिक विज्ञान, कक्षाओं व मूल्यण चिंतन पर समाप्त नहीं होती हैं। नैतिकता के विविध आयामों को विद्यालय में पढ़ाऐं जाने वाले हर विषय भी समाहित करते है। चाहे विज्ञान विषय हो या वाणिज्य, चाहे भाषा हो या कला हर विषय के हर क्षेत्र में नैतिकता से बर्ताव व व्यवहार के मानदण्ड होते हैं। नैतिकता को केवल दैनिक सभा व सप्ता के एक कालखण्ड से आगे विद्यालयीन विषयों के अर्न्तगत भी स्थान देने से नैतिकता का शैक्षिक क्षेत्र में उचित विकास होगा।
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