भारतीय शिक्षा और मैकाले - Indian Education and Macaulay

भारतीय शिक्षा और मैकाले - Indian Education and Macaulay


1) शिक्षा नीति में स्थिरता लाना:- मैकाले ने शिक्षा नीति स्थिरता लाई। इसके बाद भारत में अंग्रेजी शिक्षा का प्रसार शीघ्रता से हुआ।


2) पाश्चात्य ज्ञान-विज्ञान से परिचय:- शिक्षा का माध्यम अंग्रेजी ज्ञान से भारतीय लोगों का पाश्चात्य ज्ञान-विज्ञान से परिचय हुआ।


3) देशी भाषा विकास में बाधक:- मैकाल के विवरण पत्र ने सबसे ज्यादा बाधा देशी भाषा के विकास में आई।


4) भारतीय संस्कृति को मिटाने का कार्य:- मैकाल का भारत आगमन भारतीय जनता के हित में नहीं था बल्कि उसने भारतीय संस्कृति को मिटाने का कार्य किया।


(5) पथ-प्रदर्शक नहीं:- भारतीय शिक्षा के इतिहास में कुछ विद्वाना ने मैकाल का पथ-प्रदर्शक कहा है। परंतु यह सर्वधा निराधार एवं असत्य है क्योंकि मैकाल के आने से पूर्व ही भारत में अंग्रेजी की मांग थी और मैकाल से पूर्व राजा राममोहन रॉय भी अग्रेजी भाषा का माध्यम बनाना चाहते थे। मैकाल से पूर्व ईसाई मिशनरियाँ भी अंग्रेजी माध्यम चाहती थी इसलिये उसे पथ प्रदर्शक (Torch Bearer) नहीं कहा जा सकता।


6) राजभक्तों के वर्ग का निर्माण:- मैकाल ऐसा वर्ग उत्पन्न करना चाहता था जो रंग-रूप में भारतीय परन्तु विचार, वेषभूषा, रुचिया तथा चिंतन में अंग्रेज होगा। 


7) राष्ट्रीय एकता पर प्रहार:- मैकाल ने भारतीया का एक दूसरे से अलग करना चाहा उसन राष्ट्रीय एकता पर प्रहार किया। जिसका असर आज भी दिखता है।


8) निस्यंदन सिद्धांत:- निस्यंदन सिद्धांत का अर्थ यह है कि शिक्षा केवल उच्च वर्ग को दी जाए। यह आशा की जाती है कि खुद निम्नवर्ग उच्च वर्ग के संपर्क में आकर शिक्षित हा जाएगा। मैकाल का कहना था कि अग्रज सरकार के पास इतना धन नहीं है कि वह सर्वसाधारण जनता का शिक्षित कर इसलिए शिक्षा सिर्फ उच्च वर्ग को प्रदान की जाए।


"जनसमूह में शिक्षा ऊपर से छन-छन कर पहुंचानी थी, बूंद-बूंद करके भारतीय जीवन के हिमालय से लाभदायक शिक्षा नीच का वह जिससे कि वह कुछ समय में चौड़ी एवं विशाल धारा में परिवर्तित होकर शुष्क मैदाना का सिंचित कर"।