भारतीय स्त्री और विकास: कुछ आँकड़े - Indian Women and Development: Some Statistics

भारतीय स्त्री और विकास: कुछ आँकड़े - Indian Women and Development: Some Statistics


विकास के सामाजिक, राजनैतिक और आर्थिक पहलू के संदर्भ में राष्ट्रीय परिवार सर्वेक्षण और श्रम मंत्रालय, भारत सरकार की रिपोर्टों पर एक नज़र डाल लेना उचित है। भारत सरकार की की एक रिपोर्ट के अनुसार स्त्रियों पर हिंसा घरेलू एवं सामाजिक की दर पिछले दशकों में उत्तरोत्तर बढ़ी है। नेशनल क्राइम रिकार्ड ब्यूरो ने प्रतिवर्ष स्त्रियों के यौन उत्पीड़न, दहेज हत्या और ह्यूमन ट्रैफिकिंग के मामलों में सन 2000 के बाद रिकार्ड बृद्धि दर्ज की है। पिछले दशक के मुकाबले स्त्री श्रम और स्त्री कर्मचारियों की संख्या सार्वजनिक क्षेत्र में बढ़ी है। एक अनुमान के अनुसार घरेलू स्त्री कामगारों की संख्या दो करोड़ के आसपास है। अपने देश में 1996 में कृषि के सार्वजनिक और निजी क्षेत्र में एक हज़ार पुरुषों के पीछे 49.20 और 42.30 • फीसदी स्त्रियों को रोज़गार मिला हुआ था। कृषि क्षेत्र में खियां बड़र संख्या में काम कर रही हैं भारत सरकार ने कृषि क्षेत्र की स्त्रियों के लिए बहुत सी योजनाएं शुरू की हैं। अपनी भूमि पर सिंचाई व्यवस्था के लिए स्त्री कृषक को जो सरकारी कर्ज मिलता है उस पर 90 प्रतिशत सब्सिडी है।


जहाँ तक शिक्षा का सवाल है देश में अनुमानत: 24 करोड़ 50 लाख स्त्रियां निरक्षर हैं। भारत में स्त्री साक्षरता की दर विश्व के परिदृष्य पर अति पिछड़ी स्थिति में है। मानव विकास रिपोर्ट 2000 के अनुसार भारत में स्त्री साक्षरता दर (50 प्रतिशत) सब सहारा अफ्रीका से भी कम है। जबकि जांबिया, रवाण्डा नाइजीरिया, सूडान और मेडागास्कर में 69,57,53,54 प्रतिशत स्त्री साक्षरता की दर है। इसके अतिरिक्त भारत में स्त्री स्वास्थ्य की स्थिति चिंताजनक है। यह लगभग 50 प्रतिशत विवाहित स्त्रियों में रक्त की कमी है। इसके अतिरिक्त सरकारी आंकड़े यह बताते हैं कि लगभग दो ढाई करोड़ लड़कियां एवं स्त्रियाँ भारतीय जनसंख्या से लापता हैं। वे भ्रूण हत्या समेत बालिका शिशु मृत्यु का शिकार भी हो जाती हैं।