व्यक्ति और समाज - individual and society
व्यक्ति और समाज - individual and society
मनुष्य एक सामाजिक प्राणी है। उसका जन्म एक परिवार में होता है जो उसके प्राथमिक समाज का रूप लेता है। इसके बाद जैसे-जैसे वह बड़ा होता जाता है उसके संपर्क में दूसरे व्यक्ति आते-जाते है और इन सबके फलस्वरूप उसका सामाजिक एवं व्यक्तित्व विकास होता है। सामाजिक विकास से तात्पर्य विकास की उस प्रक्रिया से है जिससे व्यक्ति अपने सामाजिक वातावरण के साथ अनुकूलन करता है सामाजिक परिस्थितियों के अनुरूप अपनी आवश्यकताओं व रुचियों पर नियंत्रण करता है, दूसरों के प्रति अपने उत्तरदायित्व का अनुभव करता है तथा अन्य व्यक्तियों के साथ प्रभावपूर्ण ढंग से सामाजिक सम्बन्ध स्थापित करता है। सामाजिक विकास के फलस्वरूप व्यक्ति समाज का एक मान्य, सहयोगी, उपयोगी तथा कुशल नागरिक बन जाता है। इस सन्दर्भ में हम अगले खंड में ब्रानफेनवैनेर के पारिस्थितिक मॉडल (Bronfenbrenner's Ecological Model) पर प्रकाश डालेंगे।
ब्रानफ्रेनब्रैनेर का पारिस्थितिक मॉडल
यूरी ब्रानफेनर (१९९४) द्वारा दिए गए पारिस्थितिक मॉडल में व्यक्ति को सामाजिक प्रक्रियाओं का केंद्र माना गया है। इस मॉडल के अनुसार कुछ परिस्थितिय संस्थाएँ /संरचनाऐं मनुष्य को प्रत्यक्ष रूप से प्रभावित करती है और उसके सामाजिक विकास में महत्वपूर्ण योगदान प्रदान करती हैं जैसे-परिवार, मित्र, स्कूल, पड़ोसी, जनसंचार आदि। ये सभी मिलकर सूक्ष्मतंत्र (Microsystem) का निर्माण करते हैं। ये सभी संस्थाएँ न केवल व्यक्ति से परस्पर सम्बन्ध स्थापित करती हैं अपितु आपस में भी अंतक्रिया करती रहती हैं। आयु बढ़ने पर जब व्यक्ति का संज्ञानात्मक विकास होता है तथा उसका सामाजिक दायरा बढ़ता हैं, तब 'वृहदतंत्र (Macrosystem) के घटक जैसे लिंग जाति, वर्ग, क्षेत्र, धर्म आदि सूक्ष्मतंत्र में समावेशित संस्थाओं एवं संरचनाओं द्वारा व्यक्ति के समाजीकरण अहम् भूमिका निभाते हैंइसके अलावा 'बाह्यतंत्र' (Exosystem) के अवयव जैसे अर्थव्यवस्था (Economy), कानून एवं व्यवस्था (Law and order) नीति / नैतिकता (Ethics), संविधान (Constitution) आदि भी अप्रत्यक्ष रूप से व्यक्ति के सामाजिक विकास को प्रभावित करते हैं।
सामाजिक विकास को प्रभावित करने वाले कारक
व्यक्ति के सामाजिक विकास में निम्नलिखित कारक अपनी भूमिका निभाते हैं-
१. आनुवांशिकी (Heredity)
बंशानुक्रम व्यक्ति के शारीरिक और मानसिक विकास के साथ-साथ उसके सामाजिक बिकास को भी प्रभावित करता है। अनेक सामाजिक गुण व्यक्ति को वंश परंपरा के रूप में अपने माता-पिता तथा अन्य पूर्वजों से प्राप्त होते हैं
२. शारीरिक तथा मानसिक विकास (Physical and Mental Development )
शारीरिक दृष्टि से स्वस्थ तथा विकसित मस्तिष्क वाले बच्चों के समाजीकरण की संभावनाएँ अधिक होती हैं। बीमार अपंग तथा अल्प बुद्धि वाले बालक प्रायः सामाजिक अवहेलना सहते हैं
जिसके फलस्वरूप उनमें हीनता की भावना विकसित हो जाती हैं और वे अन्य बच्चों के साथ स्वयं को समायोजित करने में कठिनाई का अनुभव करते हैं।
३. संवेगात्मक विकास (Emotional Development )
जिन बच्चों में प्रेम, स्नेह, अनुराग, मित्रता, सहयोग, हास-परिहास के भाव अधिक होते हैं वे सभी को अपनी ओर आकर्षित कर लेते हैं तथा स्नेह व आकर्षण का पात्र बन जाते हैं इसके विपरीत जिन बच्चों में ईर्ष्या, द्वेष, क्रोध, घृणा, नीरसता आदि नकारात्मक भाव होते हैं, वे किसी को भी अच्छे नहीं लगते हैं तथा ऐसे बालकों की सभी उपेक्षा करते हैं।
४. परिवार (Family)
समाजीकरण का प्रारंभ परिवार से होता है। परिवार का वातावरण, संस्कृति, सदस्यों का आचरण, शिक्षा स्तर आर्थिक स्तर, सहयोग, पालन पोषण आदि बच्चों के सामाजिक विकास को प्रभावित करते हैं।
बच्चे अपने माता-पिता तथा परिवार के अन्यो सदस्यों के समान आचरण तथा व्यवहार करने का प्रयास करते हैं। खंडित परिवार या घरेलू हिंसा में पल-बढ़ रहे बच्चों का सामाजिक विकास प्रायः समुचित ढंग से नहीं होता है जिसके फलस्वरूप वह एकाकी महसूस करने लगते हैं और दूसरों के साथ परस्पर संबंध स्थापित करने में असमर्थ होते हैं।
५. समाज ( Society )
सामाजिक व्यवस्था बच्चों के समाजीकरण को एक निश्चित दिशा प्रदान करती है। समाज के कार्य, आदर्श तथा प्रतिमान बच्चों के समाजीकरण की दृष्टिकोण का निर्माण करते हैं। ग्रामीण व शहरी समाज में पल बढ़ रहे बच्चों के सामाजिक व्यवहार में स्पष्ट अंतर देखा जा सकता है।
६. विद्यालय ( School)
बच्चों के सामाजिक विकास में विद्यालय का सर्वाधिक महत्वपूर्ण स्थान होता है। विद्यालय में बच्चे को अन्य बच्चों, तथा अध्यापकों से मिलने-जुलने व परस्पर सहयोग करने के तथा विभिन्न प्रकार की सामूहिक क्रियाओं में भाग लेने के अवसर मिलते हैं जो समाजीकरण की दिशा को निर्धारित करते हैं। इससे उसे परस्पर सामाजिक सम्बन्ध बनाने तथा सामाजिक अन्तर्किया करने के प्रचुर अवसर प्राप्त होते हैं।
उपर्युक्त वर्णित कारकों के अतिरिक्त कुछ अन्य कारक भी बच्चों के सामाजिक विकास पर प्रभाव डालते हैं। जैसे- संस्कृति, राजनीतिक दल, साहित्य, धार्मिक संस्थाएँ तथा रेडियो व् दूरदर्शन आदि जनवार माध्यम भी बच्चों के सामाजिक विकास में महत्वपूर्ण भूमिका अदा करते हैं।
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