विद्यार्थियों में वैयक्तिक भिन्नता - individual differences among students

विद्यार्थियों में वैयक्तिक भिन्नता - individual differences among students


 प्रत्येक विद्यार्थी अपने आप में भिन्न होता है। उसकी सम्पूर्ण शारीरिक और मानसिक विशेषताएं एक समान स्तर की नहीं होती। विद्यार्थियों भिन्नता के अंतर्गत शरीर रचना, विशिष्ट योग्यताएँ, बुद्धि, रुचि, स्वभाव, उपलब्धि आदि की भिन्नता से विद्यार्थी के समस्त रूप की पहचान की जाती है। विद्यार्थियों में पायी जाने वाली विभिन्नताओं के कारण हम किन्ही दो विद्यार्थियों को एक-दूसरे का प्रतिरूप नहीं कह सकते हैं। आइए मानव विविधता के कुछ प्रमुख आयामों पर चर्चा करते हैं।


शारीरिक भिन्नता:- शारीरिक दृष्टि से विद्यार्थियों में अनेक प्रकार की भिन्नता का अवलोकन किया जा सकता है। जैसे कि, रंग, रूप, भार, कद, बनावट, यौन-भेद, शारीरिक परिपक्वता आदि।


मानसिक भिन्नता :- मानसिक दृष्टि से विद्यार्थियों में भिन्नता का दर्शन होता है। कोई विद्यार्थी प्रतिभाशाली, तो कोई अत्याधिक बुद्धिमान, कोई कम बुद्धिमान तो कोई मूर्ख होता है।

इतना नहीं, एक ही विद्यार्थी में शैशवावस्था, किशोरावस्था और अन्य अवस्थाओं में भिन्न-भिन्न मानसिक योग्यता पाई जाती है। इस योग्यता की जाँच करने के लिए बुद्धि परीक्षाणों, उपलब्धि परीक्षाणों आदि प्रकार के उपकरणों का निर्माण किया गया है।


संवेगात्मक भिन्नता:- संवेगात्मक दृष्टि से विद्यार्थियों के भिन्नताओं को सहज ही जाना जा सकता है। इन भिन्नताओं के कारण ही कुछ विद्यार्थी उदार हृदय, कुछ कठोर हृदय, कुछ खिन्न, चित्त और कुछ प्रसन्न चित्त के होते है। उनकी संवेगात्मक विभिन्नताओं का मापन करने के लिए संवेगात्मक परीक्षाणों का निर्माण किया गया है।


रुचियों में विभिन्नता :- रुचियों की दृष्टि से विद्यार्थियों में कभी-कभी आश्चर्यजनक विभिन्नताएँ देखने को मिलती हैं। किसी को संगीत में किसी को चित्रकला में, किसी को खेल में और किसी को वार्तालाप में रुचि होती है। प्रत्येक विद्यार्थी कि रुचि में उसकी आयु को दृष्टि के साथ-साथ परिवर्तन होता जाता है। यही कारण है कि बालकों और वयस्कों की रुचियों में भिन्नता होती है।


विचारों में भिन्नता:- विचारों कि दृष्टि से विद्यार्थियों की भिन्नताओं को सामान्यतः स्वीकार किया जाता है। विद्यार्थियों में इन विचारों के विविध रूप मिलते हैं, जैसे कि, उदार, अनुदार, धार्मिक, अधार्मिक, नैतिक, अनैतिक, आदि। समान विचार या विचारों के विद्यार्थी बड़ी कठिनाई से मिल पाते हैं। विचारों की भिन्नताओं के अनेक कारणों में से मुख्य है आयु, लिंग, और विशिष्ट परिस्थितियां जिनमें घर, समाज, का वातावरण आदि।


सीखने की प्रक्रिया में भिन्नता:- सीखने की दृष्टि से व्यक्तियों और विद्यार्थियों में अनेक प्रकार की भिन्नताएँ दृष्टिगत होती हैं। कुछ विद्यार्थी किसी कार्य को जल्दी और कुछ देर से सीखते है। इस सम्बन्ध में क्रो एवं क्रो कहते है। एक ही आयु के बालकों में सीखने की तप्तरता का समान स्तर होना आवश्यक नहीं है। उनकी सीखने की भिन्नता के कारण है उनकी परिपक्वता की गति में - भिन्नता और उसके द्वारा किसी बात का पहले से सीखे हुए होना।"


गत्यात्मक योग्यताओं में भिन्नता:- गत्यात्मक योग्यताओं की दृष्टि से विद्यार्थियों में अत्याधिक भिन्नताओं का होना पाया जाता है। इन भिन्नताओं के कारण ही कुछ विद्यार्थी एक कार्य को अधिक कुशलता से और र कुछ कम कुशलता से करते है। इस प्रकार की कुशलता की योग्यता में आयु के साथ-साथ वृद्धि होती जाती है।


चरित्र में भिन्नताः चरित्र कि दृष्टि से सभी विद्यार्थियों में कुछ-न-कुछ विभिन्नता का होना अनिवार्य है। विद्यार्थी अनेक बातों से प्रभावित होकर एक विशेष प्रकार का चरित्र निर्माण करते है। शिक्षा, संगीत, परिवार, आस पड़ोस आदि सभी घटकों का चरित्र पर प्रभाव पड़ता है और सभी चरित्र के विभिन्न स्वरूप को निश्चित करते है।


विशिष्ट योग्यताओं में भिन्नता:- विशिष्ट योग्यताओं कि दृष्टि से विद्यार्थियों में अनेक भिन्नताओं का अनुभव किया जाता है। इस सम्बन्ध में उल्लेखनीय बात यह है कि सरल व्यक्तियों में विशिष्ट योग्याताएँ नहीं होती है। और जिनमें होती भी है, उनमें इनकी मात्रा में अन्तर अवश्य मिलता है। न तो सब विद्यार्थी खेल में एक स्तर के होते है और न सब नाटयकला में।