अनौपचारिक पर्यावरण शिक्षा - informal environmental education

अनौपचारिक पर्यावरण शिक्षा - informal environmental education


अनौपचारिक पर्यावरण शिक्षा किसी भी आयु वर्ग के व्यक्तियों के सामाजिक, आर्थिक तथा सांस्कृतिक विकास हेतु आयोजित की जाती है । इस स्तर पर समूह में कार्यक्रमों की व्यवस्था की जाती हे क्लब, प्रदर्शनी, सभाओं, व्याख्यानों तथा दूरदर्शन, दूरसंचार पर पर्यावरण सम्बन्धी कार्यक्रमों का आयोजन किया है। इसके अंतर्गत -


• प्रौढ़ शिक्षा कार्यक्रम


• ग्रामीण युवको की अनौपचारिक शिक्षा


• पर्यावरण विकास सम्बन्धी कैम्प


• गैर-सरकारी पर्यावरण-शिक्षा आते है।


पर्यावरण शिक्षा में 'शैक्षिक पर्यटन' विधि का उपयोग सभी स्तरों पर किया जाता है। इससे राष्ट्रीय क्षेत्रीय तथा स्थानीय पर्यावरण समस्याओं की वास्तविक जानकारी होती हे अतः इसकी व्यवस्था प्रभावशाली ढंग से की जानी चाहिए। पर्यावरण शिक्षा की पाठ्यवस्तु की प्रकृति सैद्धान्तिक एवं व्यावहारिक दोनों ही है इसलिए शिक्षा विधियों तथा शिक्षण आयामों का उपयोग किया जाता है:


1. व्याख्यान विधि


2. सामूहिक वाद-विवाद


3. सेमिनार तथा कार्यशाला


4. दूरवर्ती - शिक्षण-संचार माध्यम


5. शैक्षिक पर्यटन


6. नाटकीय - विधि


इन विधियों को सैद्धांतिक पक्ष अथवा ज्ञान, बोध तथा सचेतना के लिये प्रयुक्त किया जाता है। प्रयोगात्मक या व्यावहारिक पक्ष, कौशल, कार्यक्षमता अभिवृत्ति तथा मूल्यों के विकास हेतु अधोलिखित विधियों को प्रयुक्त किया जाता है।


1. लघु समूह योजना


2. सामूहिक वृहत योजना


3. प्रदर्शन - विधि


4. अनुरूपण खेल विधि


5. योजना-विधि


6. सामाजिक उत्पादक कार्य इनकी व्याख्या निम्न प्रकार से है-