अनुदेशन की युक्तियाँ , अनुदेशन की प्रक्रिया - instructional tips, instructional process

अनुदेशन की युक्तियाँ , अनुदेशन की प्रक्रिया - instructional tips, instructional process

आज अनुदेशन कक्षा शिक्षण के साथ साथ अन्य माध्यमों द्वारा भी किया जाता है जैसे- अभिक्रमित अनुदेशन (Programmed Instruction), रेडियो या दूरदर्शन अनुदेशन (Radio or T.V. instruction) या कंप्यूटर सहायक अनुदेशन (Computer Assisted Instruction) आदि ।


अनुदेशन की प्रक्रिया


इसमें कम से कम व किसी-न-किसी प्रकार का वार्तालाप चलता है, जिसका उद्देश्य तर्क देना, प्रमाणों की सत्यता बताना, उपयुक्तता सिद्ध करना, व्याख्या करना, निष्कर्ष निकालना आदि हैं, जिसमे समय-सीमा, उपलब्ध साधन और पाठ्यक्रम को ध्यान में रखते हुए उद्देश्यों का निर्धारण किया जाता है। उद्देश्यों को प्रायः व्यवहारगत परिवर्तनों के रूप में लिखा जाता है। ये उद्देश्य यदि प्राप्त हो जाते हैं तब इसका अर्थ यह है कि अनुदेशन के पश्चात शिक्षार्थी इन व्यवहारों को प्रदर्शित कर सकेगा। अनुदेशन व्यवहारगत परिवर्तन पर आधारित होता है। इसमे दो प्रकार के व्यवहार पर बल दिया जाता है


1. न्यूनतम आवश्यक व्यवहार जो विषय वस्तु को सीखने के लिए आवश्यक पूर्वज्ञान से सम्बंधित है।


2. अंतिम व्यवहार- जिन्हें शिक्षार्थी विषयवस्तु को सीखने के परिणामस्वरूप प्रदर्शित करता है। अनुदेशन के आधारभूत सिद्धांत- अनुदेशक को अनुदेशन देने के पूर्व निम्नलिखित सिद्धांतों को ध्यान में रखना चाहिए:


• कक्षा सीखने के लिए अभिप्रेरित होनी चाहिए।


• छात्र में सीखने की इच्छा जागृत होनी चाहिए।


• रुचि को छात्रों का ध्यान केन्द्रित करने का आधार बनाया जाना चाहिए


अनुदेशन की युक्तियाँ


विभिन्न शिक्षण विधियों जैसे व्याख्यान विधि, सहभागिता अधिगम, पारस्परिक व्याख्यान विधि, प्रयोजन विधि, संवाद विधि, समूह चर्चा आदि का उपयोग अनुदेशन की युक्तियों के रूप में किया जाता है।

शिक्षण प्रक्रिया में शिक्षक और छात्र के मध्य अंतःक्रिया महत्वपूर्ण स्थान रखती है। समुचित रूप से अंतःक्रिया न होने पर शिक्षक अपने उद्देश्यों को प्राप्त करने में विफल रहता है समुचित अंतःक्रिया हेतु यह आवश्यक है कि शिक्षक अपने छात्रों पर विशेष रूप से ध्यान दे, किन्तु आज निरंतर बढ़ती हुई जनसंख्या तथा ज्ञान के विवध क्षेत्रो में तीव्र गति से हुए विकास के कारण प्रत्येक छात्र पर ध्यान देने पर शिक्षक स्वयं को असमर्थ महसूस कर रहा है। ऐसी परिस्थिति में शिक्षण की ऐसी नवीनतम विधियों की खोज की ओर शिक्षाशास्त्रियों का ध्यान आकर्षित हुआ जिनके द्वारा छात्र स्वयं ज्ञान अर्जित कर सके और उससे शिक्षक की प्रतिक्रिया भी प्राप्त हो सके इसी क्रम में निम्न शिक्षण पद्धतियाँ शामिल है।


• अभिक्रमित अनुदेशनज्ञान


• कंप्यूटर सहायक अनुदेशन


• व्यक्तिगत अनुदेशन प्रणाली