साक्षात्कार - Interview

साक्षात्कार - Interview


साक्षात्कार विधि निर्देशन प्रक्रिया का अभिन्न अंग है । यह आत्मनिष्ठ विधि है । साक्षात्कार मूलभूत रूप में निश्चित उद्देश्य के साथ वार्तालाप है । इस विधि में साक्षात्कारकर्ता तथा सूचना प्रदाता एक-दूसरे के आमने सामने बैठकर सम्बन्ध स्थापित कर वार्तालाप करते हैं तथा वांछित सूचनाएँ प्राप्त की जाती हैं। साक्षात्कार को परामर्श प्रक्रिया का केन्द्र भी माना जाता है।


डेजिन ने साक्षात्कार के अर्थ को स्पष्ट करते हुए लिखा है, "साक्षात्कार आमने सामने किया गया एक संवादोचित आदान प्रदान है जहाँ एक व्यक्ति दूसरे व्यक्ति से कुछ सूचनायें प्राप्त करता है।"


साक्षात्कार के सोपान :- साक्षात्कार करना एक कला है। साक्षात्कारकर्ता (निर्देशनकर्ता) इसे प्रभावी बनाने हेतु कुछ निर्धारित सोपानों का प्रयोग करता है।

इसके बिना साक्षात्कार का कोई स्वरूप नहीं बनता है और न ही वांछित परिणाम प्राप्त किए जा सकते हैं। ये सोपान निम्नवत हैं


प्रथम चरण - साक्षात्कार की तैयारी या आरम्भ


द्वितीय चरण - साक्षात्कार का ढाँचा


तृतीय चरण - साक्षात्कार की समाप्ति


अन्तिम चरण - मूल्यांकन या अनुवर्तन


प्रथम चरण- साक्षात्कार की तैयारी या आरम्भ : यह साक्षात्कार कार्यक्रम की प्राथमिक चरण है साक्षात्कार के इस सोपान में साक्षात्कारकर्ता, साक्षात्कार देने वाले के साथ वातावरण को साक्षात्कार के अनुकूल बनाता है।


द्वितीय चरण - साक्षात्कार का ढाँचा : यह साक्षात्कार का महत्वपूर्ण भाग है। यह प्रार्थी की समस्या के किसी पक्ष को छूता है। इस अर्थ में यह भाग साक्षात्कार प्रक्रिया की अति संवेदनशील अवस्था है । साक्षात्कार के परिणाम इसी भाग पर निर्भर करते हैं।


तृतीय चरण - साक्षात्कार की समाप्ति : किसी भी कार्य की उचित रूप में समाप्ति से उसका प्रभाव परिणामों पर अवश्य पड़ता है। साक्षात्कार के लिए भी एकदम समाप्त होने की घोषणा नहीं करनी चाहिए अन्यथा वांछित परिणाम प्राप्त नहीं हो सकते साक्षात्कार की समाप्ति से पूर्व प्रार्थी को सन्तुष्ट होना चाहिए तथा साक्षात्कार की समाप्ति पर साक्षात्कारकर्ता, सूचना प्रदाता से सुखद वाक्य अवश्य कहे। 


अन्तिम चरण - मूल्यांकन तथा अनुवर्तन:- इस चरण को पश्च साक्षात्कार भी कहते हैं। इस चरण में देखा जाता है कि साक्षात्कारकर्ता द्वारा दिये गए सुझावों का प्रार्थी ने अनुसरण किया या नहीं। साक्षात्कार की सफलता का यह सोपान संकेत होता है।



निर्देशन में साक्षात्कार की उपयोगिता: निर्देशन, साक्षात्कार के बिना अधूरा है । निर्देशन में साक्षात्कार की निम्नलिखित उपयोगिता है -


i. इस विधि का प्रयोग विभिन्न प्रकार की समस्याओं को समझने में किया जा सकता है।


ii. इसके द्वारा व्यक्ति के व्यक्तित्व को सम्पूर्ण रूप से समझा जा सकता है।


III. यह विधि समस्या केन्द्रित होने के कारण अधिक महत्वपूर्ण है। 


iv. साक्षात्कार द्वारा प्रार्थी के दृष्टिकोण, भावनाओं व प्रतिक्रियाओं का अध्ययन किया जा सकता है।


V. साक्षात्कार द्वारा प्रार्थी के अतीत की घटनाओं के बारे में भी जाना जा सकता है।