अतिरिक्त रोकड़ का विपणन योग्य प्रतिभूतियों में विनियोजन - Investing surplus cash in marketable securities

अतिरिक्त रोकड़ का विपणन योग्य प्रतिभूतियों में विनियोजन - Investing surplus cash in marketable securities


यदि फर्म के पास आवश्यकता से अधिक रोकड़ है तो उसका विनियोग उचित ढंग से किया जाना चाहिए। विनियोग करने के लिये कई प्रकार की अल्पकालीन प्रतिभूतियाँ उपलब्ध हो सकती है। उनमें से सही विकल्प का चुनाव करके विनियोग के लिये उसका उचित प्रबंध किया जाना चाहिए। यह ध्यान रखना चाहिए कि विनियोग के लिये प्रतिभूति ऐसी हो जिसे आवश्यकता पड़ने पर शीघ्र ही रोकड़ में परिवर्तित किया जा सके।


इन विपणन योग्य अल्पकालीन प्रतिभूतियों का चुनाव करते समय निम्नलिखित तत्वों पर विशेष ध्यान देना चाहिए -


1)सुरक्षा (Safety) - प्रतिभूति ऐसी होनी चाहिए जिसमें जोखिम न्यूनतम हो और सुरक्षा अधिकतम हो यदि फर्म को निकट भविष्य में रोकड़ की आवश्यकता हो तो निश्चित रूप से केवल सुरक्षित प्रतिभूतियों का ही क्रय किया जाना चाहिए।

अधिक प्रतिफल देने वाली प्रतिभूतियों में जोखिम अधिक होता है। अतः उनका चुनाव नहीं किया जाना चाहिए इसमें जोखिम का तात्पर्य पूँजी और ब्याज का समय से न मिल पाने का है।


2) परिपक्वता (Maturity) - अल्पकालीन विपणन योग्य प्रतिभूतियों का चुनाव करते समय उनके परिपक्व होने की अवधि पर ध्यान देना चाहिए भिन्न-भिन्न प्रतिभूतियों के लिये अवधि समाप्त होने पर मूलधन तथा ब्याज वापस लाने की अवधि अलग-अलग होती है। दीर्घकालीन प्रतिभूतियाँ जिनकी परिपक्वता की अवधि लंबी होती है, जोखिम भी अधिक होता है। लंबे समयावधि में ब्याज दर में उच्चावचन भी अधिक होता है। इस दृष्टि से अल्पकालीन प्रतिभूति का चुनाव करना चाहिए।


3) विपणन योग्यता (Marketability) विपणन योग्यता का तात्पर्य सुविधा व गति से है, जिनमें प्रतिभूति या विनियोग को रोकड़ में बदला जा सके। इस संबंध में मूल्य तथा समय पर विशेष ध्यान देना चाहिए। यदि प्रतिभूति को आसानी से तथा शीघ्र ही बेचा जा सके और उससे मूल्य की हानि भी न हो तो उसे विपणन योग्य प्रतिभूति कह सकते हैं। सरकारी कोष बिल को तरल तथा सुरक्षित माना जा सकता है।