कार्य विश्लेषण, कार्य विवरण एवं कार्य विशिष्टीकरण - Job Analysis, Job Description and Job Specification
कार्य विश्लेषण, कार्य विवरण एवं कार्य विशिष्टीकरण - Job Analysis, Job Description and Job Specification
कर्मचारी का वैधानिक आधार पर चयन करने हेतु या कर्मचारी द्वारा वैज्ञानिक आधार पर अपने लिए उपयुक्त कार्य का चयन करने हेतु कार्य से संबंधितविवरण की आवश्यकता होती है जिसे कार्य विवरण कहते हैं। कार्य विवरण की प्राप्ति कार्य विश्लेषण के माध्यम से होती है। कार्य विश्लेषण किसी कार्य से संबंधित विविध पक्षों का सूक्ष्म अध्ययन करने की प्रक्रिया है। किसी कार्य को करते समय कार्य की दशा और स्वरूप के बारे में सूचना संकलित करने की प्रक्रिया को ही कार्य विश्लेषण कहते हैं। कार्य विश्लेषण के द्वारा किसी कार्य को करते समय कार्य, कार्य परिस्थिति और व्यक्ति की विशेषताओं के बारे में जानकारी प्राप्त की जाती है । कार्य विश्लेषण की कुछ परिभाषाएं प्रस्तुत हैं:
अनेस्टी के अनुसार " कार्य विश्लेषण का उद्देश्य उस कार्य के लिए, जिसके हेतु कर्मचारी का चयन प्रक्रिया विकसित की जा रही है,
कर्मचारी द्वारा किए जाने वाले कार्यों का विवरण उपलब्ध कराना होता है। इस विवरण में निष्पादित होने वाले संक्रियाओं, प्रयुक्त उपकरणों, कार्यों की दशाओं, खतरे और कार्य की अन्य विशिष्ट विशेषताएं, वेतन की दर, वांछित प्रशिक्षण का स्वरूप और मात्रा, पदोन्नति या स्थानान्तरण के अवसर, अन्य कार्यों से संबंध तथा अन्य प्रासंगिक सूचनाओं को सम्मिलित किया जाना चाहिए"
" घिसेली तथा ब्राउन के अनुसार "कार्य विश्लेषण एक वर्णनात्मक प्रक्रिया है। इसमें यह वर्णन रहता है कि कर्मचारी वस्तुतः अपने काम पर कार्य के कैसे निष्पादित करते हैं, और किन वास्तविक दशाओं के अर्न्तगत कार्य किया जाता है। कार्य विश्लेषण का परिणाम कार्य विवरण में प्रस्तुत किया जाता है। घोरपडे के अनुसार " कार्य विश्लेषण में कार्य में सम्मिलित नियत कार्य का विवरण विकसित करना,
एक कार्य का अन्य कार्यों के साथ सम्बन्ध का निर्धारण करना, और कर्मचारी के लिए अपने कार्यों के सफल निष्पादन हेतु आवश्यक ज्ञान, दक्षताओं एवं क्षमताओं का निर्धारण करना सम्मिलित है।" कार्य विश्लेषण के लिए अनेक विधियों एवं सूचना साधनों का उपयोग किया जाता है जिसका वर्णन आगे किया जा रहा है। कार्य विश्लेषण द्वारा कार्य विवरण और कार्य विशिष्टीकरण प्राप्त होता है। कार्य विवरण और कार्य विशिष्टीकरण क्या है, दोनों में क्या अन्तर है तथा कार्य विश्लेषण से इनका क्या, संबंध है, कर्मचारी चयन में इनका महत्व है। इन प्रश्नों का समाधान राबिन्स ने किया है।
स्टीफेन पी0 राबिन्स ; 2001 के अनुसार- "कार्य विवरण इस बात का विवरण है कि कोई पदधारक क्या करता है, कैसे करता है और वैसे क्यों करता है। कार्य विवरण को कार्य की अंतर्वस्तु, परिवेश और परिस्थितियों का परिशुद्ध वर्णन करना चाहिए ।
कार्य विशिष्टीकरण यह बताता है कि किसी कार्यभार को ग्रहण करने वाले कर्मचारी के पास अपने कार्यों के सफल निष्पादन हेतु न्युनतम स्वीकार्य योग्यता क्या होनी चाहिए। यह कार्य को सफलतापूर्वक पूरा करने के लिए आवश्यक ज्ञान दक्षाताओं और योग्यताओं की पहचान करता है। इस प्रकार कार्य विवरण काम की विशेषताओं की पहचान करता है जबकि कार्य विशिष्टीकरण कार्यभार ग्रहण करने वाले सफल कर्मिक की विशेषताओं की पहचान करता है । " कार्य विशिष्टीकरण के विवरण में प्रबंधन की नीतियाँ परिलक्षित होती है। कार्य विशिष्टीकरण कार्य आरम्भ से पूर्व योजनाकारों अथवा विधि व्यवस्था द्वारा प्रस्तुत किया जाता है। कार्य विशिष्टीकरण के प्रारूप पर प्रबंधन- कर्मचारी संबंधों गोष्ठियों, सहमतियों और समझौतों, तकनीकी प्रगति, कार्य और उत्पादन में परिवर्तन जैसे अनेक कारकों का प्रभाव पड़ता है।
कार्य-विवरण तथा कार्य विशिष्टीकरण दोनों का कार्य करने की विधियों, कार्य की भौतिक एवं प्रशासनिक पारिस्थितियों से सम्बन्ध है।
कार्य करने की वास्ताविक दशाओं का वरण करता है, उन पारिस्थितियों और विधियों का वर्णन करता है जो कि व्यावसायिक निर्देशन : व्यावसायिक वरण, विकास,चयन एवं समायोजन वस्तुतः कार्य से सम्बन्धित है, कार्य वास्तव में कैसे निष्पादन होता है, जबकि, कार्य विनिर्देश यह इंगित करता है कि प्रबंधतंत्र की कार्य के निष्पादन के सम्बन्ध में क्या अपेक्षाएँ है । इस प्रकार कार्य विवरण तथा कार्य विशिष्टीकरण दोनों एक दूसरे के पूरक है" शार्टल के अनुसार, कार्य-विशिष्टीकरण के साथ मिलकर कार्य विवरण हमें यह सूचित करता है कि कार्य वस्तुतः क्या चाहता है तथा एक कर्मचारी से हमारी अपेक्षाएँ क्या है। आदर्श रूप में कार्य विवरण का उपयोग नौकरियों या काम के लिए इच्छुक अभ्यर्थियों को कार्य के बारे में विवरण देने के लिए उपयोग किया जाता है। जबकि कार्य - विशिष्टीकरण कर्मचारी चयन प्रक्रिया से सम्बंन्धित लोगों का इस बात की ओर ध्यान आकृष्ट करता है कि उन्हें इच्छुक अभ्यार्थियों में कौन सी योग्यताओं की परख है जो कि उन्हें सफल, उत्पादक, संतुष्ट और समायोजित कर्मचारी बनाने में सहायक सिद्ध होगी।
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