बाल अपराधी बच्चे - juvenile delinquent children
बाल अपराधी बच्चे - juvenile delinquent children
• ऐसा कोई भी बच्चा जिसका व्यवहार सामान्य सामाजिक व्यवहार से इतना भिन्न हो जाए कि उसे समाज विरोधी कहा जा सके, बाल- अपराधी कहलाता है। बाल अपराध संवेगात्मक द्वंद्वों का परिणाम होता है। बच्चा अपराध करके इन संवेगात्मक द्वंद्वों से मुक्ति पाना चाहता है। संवेगात्मक द्वंद्वों के अलावा बच्चे के सामाजिक, पारिवारिक, विद्यालायी तथा सामुदायिक वातावरण के साथ शरीर रचना एवं मनोवैज्ञानिक पृष्ठभूमि से सम्बंधित अनेक कारण होते हैं जो बाल-अपराध का कारण बनते हैं। बाल अपराधी बच्चों के लिए परामर्श की व्यवस्था
1. बच्चे के वातावरण में सुधार - बच्चे के पारिवारिक, विद्यालयी तथा सामाजिक वातावरण का उसके व्यवहार पर व्यापक प्रभाव पड़ता है।
परामर्श तकनीकों के द्वारा बच्चे के वातावरण का अध्ययन करके, वातावरण के उन कारकों का पता लगाया जाता है जिनके कारण बच्चे बाल अपराध की ओर अग्रसर होते हैं। साथ ही इसके द्वारा वातावरण में सुधार हेतु सुझाव में • तथा विभिन्न व्यवस्थाएँ की जाती हैं ताकि बाल अपराध की रोकथाम की जा सके।
2. सुधारात्मक प्रयत्न- ऐसे बच्चे जो किन्हीं कारणवश अपराधी बन चुके हैं उन्हें विभिन्न माध्यमों के द्वारा अपराधपूर्ण जीवन से मुक्ति दिलाने के प्रयास सुधारात्मक प्रयत्न के आर्गत सम्मिलित किये जाते हैं। इसमें निम्नलिखित प्रयास शामिल हैं
क. बाल अपराधियों के अचेतनमन का विश्लेषण कर उनकी दबी हुई इच्छाओं तथा संवेगों का पता लगाकर उपचार किया जाना चाहिए। मैत्री
ख. बाल अपराधियों को उनके दोषपूर्ण वातावरण से निकालकर पूर्ण सहानुभूति व मधुर व्यवहार दिखाया जाना चाहिए तथा समाज एवं अभिभावकों को इन बच्चों के प्रति अपने रवैये को बदलने हेतु प्रोत्साहित करना चाहिए।
ग. ऐसे बच्चों के लिए विशेष बाल न्यायालयों की व्यवस्था की जानी चाहिए जिनमें विशेष रूप से प्रशिक्षित न्यायाधीश नियुक्त हों तथा ऐसे बच्चों को जेल में न भेजकर सुधार गृहों में भेजने की व्यवस्था होनी चाहिए।
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