प्रमुख कर्मचारी चयन विधियां - Key Employee Selection Methods

प्रमुख कर्मचारी चयन विधियां - Key Employee Selection Methods


उपर्युक्त विधियों में से औद्योगिक संगठनों द्वारा मुख्यतः साक्षात्कार लिखित परीक्षा, मनोवैज्ञानिक परीक्षण और छद्म कार्य निष्पादन परीक्षण का उपयोग किया जाता है। अतः इन चार विधियों का संक्षिप्त परिचय यहां प्रस्तुत है। एक बार पुनः यह याद दिलाना हमारा कर्तव्य है कि यह पुस्तक निर्देशन से संबंधित है औद्योगिक मनोविज्ञान से संबंधित नहीं किन्तु कर्मचारी चयन के बारे में विवरण इस कारण प्रस्तुत है कि निर्देशन कार्य में कर्मचारी चयन प्रक्रिया के बारे में व्यक्ति एवं परामर्शदाता दोनों को जानकारी होनी चाहिए जिससे परामर्शी, छात्र एवं अभ्यर्थी इस हेतु यथासमय अपनी तैयारी कर सकें।


आवेदन पत्र में आवेदक द्वारा अपना विवरण प्रस्तुत किया जाता है लेकिन उसकी वस्तुनिष्ठता, वैधता एवं विश्वसनीयता की परख आवश्यक है। शैक्षिक संस्था प्रशिक्षण संस्था या पूर्व संगठन द्वारा दिया गया संस्तुति पत्रभी उपयोगी होता है। कुछ खास श्रेणी के कार्यों के लिए शारीरिक परीक्षण अपरिहार्य होता है।

शैक्षिक अभिलेख निष्पादन स्तर की निरन्तरता का वर्णन करता है किन्तु कर्मचारी चयन के लिए संगठन अपने स्तर से साक्षात्कार, परीक्षण, मापन पर ही निर्भर होना पसंद करते हैं। 


(क) चयन साक्षात्कार


समूचे विश्व में चयन साक्षात्कार कर्मचारियों के चयन की मान्य प्रक्रिया के रूप में स्वीकृत है। चयन के लिए प्रयुक्त होने वाली युक्तियों में साक्षात्कार बहुधा प्रयुक्त होने वाली विधि है L. Yoo Lim, 1994 एशिया में भी अधिकतर कम्पनियाँ कर्मचारियों की परख (स्क्रीनिंग ) के लिए साक्षात्कार पर भरोसा करती हैं। अध्ययनों से ज्ञात हुआ है कि साक्षात्कार का चयन प्रक्रिया में बहुधा उपयोग ही नहीं होता है अपितु इसकी प्रभावशीलता भी अधिक है। अच्छी से अच्छी शैक्षिक योग्यता वाले अभ्यर्थी भी साक्षात्कार में अच्छा प्रदर्शन करने में विफल होने पर कार्य का अवसर पाने से वंचित रह जाते हैं

जबकि अनेक कम योग्य अभ्यर्थी भी चयनित हो जाते हैं।


इस प्रकार यह प्रदर्शित होता है कि साक्षात्कार चयन के लिए उपयोगी विधि है किन्तु थोड़े से प्रश्नों के आधार पर लापरवाहीपूर्वक सम्पन्न असंरचित साक्षात्कार विधि के अनेक सीमाएँ होती हैं । साक्षात्कारकर्त्ताओं में अनेक प्रकार के पूर्वाग्रह होते हैं जो कि कुछ अभ्यर्थियों के पक्ष में तथा अन्य के विरुद्ध होते हैं और चयन प्रक्रिया पर विपरीत प्रभाव डालते हैं अतः रॉबिन्स (2001) यह सुझाव देते हैं कि साक्षात्कार के लिए साक्षात्कारकर्त्ताओं को प्रश्नों का मानक सेट, सूचना की रिकार्डिंग के लिए एकरूपतापूर्ण प्रणाली, आवेदन पत्रों की उपयुक्त ग्रेडिंग प्रणाली जैसी विधियों का उपयोग करना चाहिए। साउथ-वेस्ट एयर लाइन्स, माइक्रोसॉफ्ट और प्राक्टर एण्ड गैम्बिल जैसी कम्पनियाँ साक्षात्कार का उपयोग अभ्यर्थी एवं संगठन के बीच मेल का अध्ययन करने हेतु कर रही हैं। साक्षात्कार के माध्यम से यह जानने का प्रयत्न किया जाता है कि संगठन की संस्कृति और छवि के अनुरूप कर्मचारी की व्यक्तिगत विशेषताएँ मूल्य आदि हैं या नहीं हैं


(ख) लिखित परीक्षा प्रणाली 


लिखित परीक्षाओं के माध्यम से अभ्यर्थी की बुद्धि, अभिक्षमता, योग्यता, रुचियों और निष्ठा को परखने का प्रयत्न किया जाता है। बौद्धिक परीक्षा, अभियांत्रिक, प्रात्यक्षिक शुद्धता, संज्ञानात्मक सामर्थ्य आदि के मूल्यांकन के लिए लिखित परीक्षा प्रणाली की पर्याप्त वैध पाया गया है। टोयोटा जैसी जापानी कम्पनी अमेरिका में अपने कारखाने के लिए कर्मचारियों का इसी विधि द्वारा परीक्षण किया है।


(ग) निष्पादन परीक्षण 


इस प्रकार के परीक्षण हेतु वास्तविक कार्य में सम्मिलित गतिविधियों के एक प्रदितर्श की रचना करके अभ्यिर्थियों की क्षमताओं का परीक्षण किया जाता है।

इस चयन प्रक्रिया का उपयोग मुख्यतः मैकेनिक वेल्डर, इलेक्ट्रीशियन जैसे दक्ष कारीगरों के चयन हेतु किया जाता है। कार निर्माता कम्पनी बी. एम. डब्लू इस प्रणाली की उपयोग करती है । 


(घ) मनोवैज्ञानिक मूल्यांकन


व्यक्तित्व और मानसिक क्षमताओं एवं विशेषताओं की जानकारी के लिए मनोविज्ञान परीक्षणों की उपयोगिता मनोविज्ञान विद्यार्थियों और कम्पनी अधिकारियों से छिपी हुई नहीं है। उक्त परीक्षण वैध और विश्वसनीय होता है। सेना में अधिकारियों की भर्ती के लिए मानसिक क्षमताओं के अध्ययन हेतु इन विधियों पर बहुत बल दिया जाता है। सैनिक अधिकारियों तथा औद्योगिक संगठन के उच्च पदस्थ प्रबंधकों को अनेक प्रकार की दबावपूर्ण एवं तनावपूर्ण दशाओं में कार्य करना पड़ता है

अतः उनकी क्षमताओं का भली प्रकार परीक्षण किया जाना चाहिए। कुछ वर्ष पहले भारतीय सेना के कुछ प्रशिक्षणरत अधिकारियों द्वारा आत्महत्या किये जाने के संदर्भ में यह तथ्य प्रकाश में आया है कि चयन की अवस्था में इन युवकों ने मनोवैज्ञानिक परीक्षा उत्तीर्ण नहीं की थी । (तथापि ) किन्ही कारणों से उन्हें प्रशिक्षण हेतु चुन लिया गया था और प्रशिक्षण अवधि में ही वे युवक तनावपूर्ण परिस्थितियों का सामना नहीं कर पाये।


(ङ) मूल्यांकन केन्द्र


कुछ संगठन कार्य स्थल पर ही अभ्यर्थियों की क्षमताओं का परीक्षण करते समय मनोवैज्ञानिकों की सेवाओं का उपयोग करते हैं। ऐसी प्रणाली को मूल्यांकन केन्द्र प्रणाली कहते हैं। इस प्रक्रिया में साक्षात्कार, कार्य परीक्षण, नेतृत्व विहीन परिचर्चा, तथा व्यापारिक निर्णय-क्रीड़ा जैसी अनेक परीक्षण गतिविधियाँ सम्मिलित की जाती हैं। इस प्रक्रिया द्वारा कर्मचारियों का चयन कार्य निष्पादन की दृष्टि से भविष्यकथन हेतु वैध पाया गया है।